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Thursday, April 16, 2026

दो माह में दम तोड गई करोड़ों की सड़क ,जिम्मेदारो कि लापरवाही से फिर धुल डस्ट और कीचड से जूझेंगे ग्रामीण ,जांच का विषय बना कोरबी से रानी अटारी मार्ग (चिरिमिरी उपक्षेत्र)

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CG City News

कोरबा /कोरबी // जिला मुख्यालय से लगभग 80 किलोमीटर दूर रानी अटारी , विजय वेस्ट कोल  माइंस संचालित है जिसे चिरिमिरी उपक्षेत्र के नाम से भी जाना जाता है। इस माइंस में एमसीबी जिला के चिरिमिरी से श्रमिक अपडाउन कर यहा काम कर रहे हैं। कोरबी बस स्टैंड से रानी अटारी लगभग 23 से 25 किलोमीटर दूर है । यह सड़क में कोयला से भरें ट्रेलरो जिसका वजन 60 से 70 टन है इस सड़क पर प्रति दिन 40 गाड़ीयां गुजरते है। जिससे सड़क में गुणवत्ता नहीं होने पर सड़क जर्जर होने में वक्त नहीं लगता और बदले में मिलता है तो धुल , डस्ट और कीचड ।
*सड़क बनने के लिए भी करना पड़ा ग्रामीणो को धरना प्रदर्शन*
2014से 2016 के बीच बनी सड़क से निकलने वाले धुल डस्ट से बच्चे बड़े जब बीमार व परेशान हो गए फिर ग्रामीणों ने हर संभव प्रयास किया जिससे सड़क बन जाए और होने वाले परेशानी से छुटकारा मिले पर ऐसा नहीं हुआ। इस सड़क से 15 गांव जुड़े हैं और आसपास के गांव मिलकर अपनी अपनी सहमति दि फिर 20 जनवरी 2023 को कोरबी से रानी अटारी मार्ग पर ग्राम सरमा के चौक में पुरुष महिलाओं सहित अन्य ग्रामीणों ने धरना प्रदर्शन किया और अपने समस्या को एसईसीएल रानी अटारी के सब एरिया सामने रखा। सब एरिया के नेतृत्व में उनके श्रमिकों द्वारा लिखित आश्वासन दिया गया कि सड़क जल्द और अच्छी बनेगी पर सब सोच से परे था जिसका परिणाम ग्रामीण आज भी झेल रहे हैं।

 

*एक वर्ष बीतने के बाद सड़क बनना प्रारंभ हुआ वह भी दो माह नहीं टिका*
सड़क बनने का कार्य 1 अप्रेल 2024 से शुरू हुआ जुलाई माह तक अपने कार्य पूर्ण करने के समाप्ती में है।
पर दम तोड दी करोड़ों कि लगात से बना सड़क सूत्रों के अनुसार क्षमता से भी कम का सड़क बनाया गया 60 टन से अधिक के वजन लिए गाड़ीयां गुजरते हैं वहीं यह सड़क सिर्फ 22 से 30 टन क्षमता तक बर्दाश्त करने के हि लायक बनी है। अब जहां बारिश का एक मौसम भी बर्दाश्त नहीं कर सका वहां अब श्रावण और भादो जैसी बरसात क्या झेल पाएगी ।
सड़क मे हुए गड्ढे से बड़ी दुर्घटना कि संभावना बनी रहती है
क्या होगा इस सड़क पर कमीशन खोरी कि जांच या पहुंच पकड़ के दम पर हो जाएगा जांच के नाम पर खानापूर्ति?

 

क्या चलता रहेगा क्षमता से कम बनने वाले सड़कों का सिलसिला?
क्या यूंही झेलते रहेंगे धुल डस्ट और किचड़ परेशानी ग्रामीण।
फिलहाल उखड़ी हुई सड़क पर मलहम लगाने जैसा कार्य प्रारंभ है।
ठेकेदार मस्त जनता पस्त , पैर से उखड़ रही सड़क
ठेकेदार द्वारा यहां बनने वाले सड़क में डामर का उपयोग इतना कम किया गया है कि  यह सड़क अपनी  मजबूती की कहानी खुद बया कर रही है , यह सड़क इतनी मजबूत बनी है कि पैर से रगड़ने मात्र से ही सड़क उखड़ने लगती है


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