गांधीवादी विचारधारा आज भी गांव के दिलों में जिंदा है।
कोरबा (छत्तीसगढ़ सिटी न्यूज ) कोरबा जिला मुख्यालय से 95 किलोमीटर दूर,वनांचल क्षेत्र विकासखंड पोड़ी उपरोड़ा ग्राम पंचायत जल्के, से 4 किलोमीटर दूर बसे ग्राम तेंदू टिकरा यहां पर कुल 74 परिवार राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र विशेष जनजाति पड़ो बाहुल्य समाज के हैं। यह गांव कई विषयों को लेकर आज बहुत ही आगे है ग्राम स्वावलंबन की ओर अग्रसर है। पूज्य महात्मा गांधी जी के बताएं मार्ग पर अनुसरण कर ग्रामीण गांव में विभिन्न प्रकार के रचनात्मक कार्य किया जा रहे हैं स्वयं के प्रेरणा से श्रमदान कर ग्रामीण कुआं तालाब आने-जाने का रास्ता स्वयं प्रेरणा से बना रहे हैं।
इस गांव में विगत 22 साल से पूर्ण रूप से शराब बंदी है। इस गांव में सभी कम और निर्णय सामूहिकता के साथ लिया जाता है जिसका परिणाम स्वरुप गांव के बीचो-बीच में पूज्य बापूजी का चिन्ह गांधी कुटी बना हुआ है जिसमें सामूहिक निर्णय लेकर गांव के कार्य योजना बनाकर सभी काम को मूर्त रूप दिया जाता है गांव में पर्याप्त श्रमदान से कुआं का भी निर्माण कर पानी में आत्मनिर्भर हो गए हैं यह सभी काम एकता परिषद के फाउंडर मेंबर सुप्रसिद्ध गांधीवादी आदरणीय पी ह्वी राजगोपाल जी की इस गांव को ग्राम स्वालंबन बनाने में सफल भूमिका रहा। इस गांव में आज तक कोई भी प्रकरण थाना में लंबित नहीं है ना कोई विवाद इस गांव में आज तक थाना में सूचना भी नहीं दिया गया है यह ऐतिहासिक गांव ग्राम स्वालंबन की ओर अग्रसर होते हुए सभी समस्याओं का निराकरण गांधी कुटी में सामूहिक ता के साथ लिया जाता है। इसी कड़ी में आज गांव के लोगों ने सामूहिक बैठक कर अपने गांव में आंगनवाड़ी संचालन करने की कार्य योजना बनाकर मूर्त रूप दे दिए हैं जिसके तहत इन सभी परिवारों ने अपने 0 से 5 वर्ष के बच्चों को पौष्टिक आहार एवं शिक्षा के महत्व को सामूहिक निर्णय से गांव में पालन करने के लिए गांधी कुटी में निर्णय लिए हैं। कोरबा जिला का यह पहला वनांचल ग्राम है जहां पर पूर्ण रूप से शराब बंदी गांव वाले स्वयं निर्णय लेकर अपने विकास के पत में आगे बढ़ रहे हैं। तेंदू टिकरा गांधी के स्वराज व सर्वोदय का उदाहरण बन चुका है एकता परिषद का भी भूमिका महत्वपूर्ण ग्रामीणों को हमेशा उनके हौसला बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहा है। तेंदू टिकरा गांव बापू के सपनों के गांव की मिसाल बन गया है। इस गांव के सभी किसान प्राकृतिक खेती जैविक खाद का उपयोग सत प्रतिशत करते हुए धरती को केमिकल मुक्त बनाने में भी भूमिका निभा रहे हैं। गांधी जी के सपनों को साकार कर रहे तेंदू टिकरा के ग्रामीण आज आत्मनिर्भर गांव आत्म स्वावलंबन गांव और पूर्ण रूप से प्राकृतिक पर निर्भर गांव का परिधि से दिखाई देता है एकता परिषद के साथियों ने इस मुकाम पर ले जाने के लिए एकता परिषद के फाउंडर मेंबर को भी धन्यवाद और जय जगत कहते हैं।

