पाली तानाखार के भीष्म पितामह एवं दिग्गज कांग्रेसी नेता वचन साय कोराम ने ठोकी ताल | 2023 के चुनावी समर में कोरबा जिला एवं प्रदेश के अनुभवी एवं तजुर्बेकार नेता ने पाली तानाखार विधानसभा चुनाव में अपनी दावेदारी प्रमुखता से दर्ज करा दी है | जिससे अन्य दावेदारों सहित वर्तमान विधायक मोहित केरकेट्टा एवं प्रदेश के नेताओ में असमंजस की स्थिति बनी हुई है |
वचन साय राजनीती की अगली पारी खेलने को बेताब है | कोरबा जिले के अंतिम छोर पिपरिया निवासी एवं ब्लॉक कांग्रेस कमिटी के वर्तमान ब्लॉक अध्यक्ष है | जिनके पास 20 साल सरपंच, 5 साल जनपद सदस्य एवं 10 साल जिला पंचायत का राजनीतिक अनुभव का लम्बा कार्यकाल रहा है। 25 वर्षो से ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद पर आसीन है।
फाइल फोटो वचन साय कोर्राम

ये ऐसे नेता है, जिनके सहयोग से रामदयाल उइके 15 वर्षो तक विधायक रहे, मोहित राम केरकेट्टा विधानसभा के लिए अपरिचित होने के बावजूद 5 वर्ष विधायक रहे वर्तमान सांसद ज्योत्सना महंत ने 60000 की लीड अकेले पाली तानाखार से ली। प्रदेश के गाँधी कहे जाने वाले वयोवृद्ध नेता बोधराम कँवर भी वचन साय के सहयोग से पाली तानाखार के विधायक रह चुके है। अर्जुन सिंह , दिग्विजय सिंह एवं अजित जोगी जैसे राजनीती के मंझे हुए खिलाड़ियों के साथ कार्य करने का लम्बा अनुभव वचन साय के पास है।
वचन साय ग्राम पंचायत के सरपंच से लेकर विधानसभा का चुनाव भी लड़ चुके है।
प्रदेश के गोंड समाज के अग्रिमपंति के नेताओ में इनकी गिनती होती रही है। वर्तमान में पाली तानाखार में गोंड समाज का वोट बैंक 80% है। जिसके लिए प्रत्याशी का गोंड समाज से होना एक प्रमुख चुनौती है। वचन साय की दावेदारी से विधानसभा मे ताल ठोक रहे प्रत्याशी वचन साय के सामने बौने साबित हो रहे है।
उनके सामने वर्तमान विधायक की भी बोलती बंद है |

अविभाज्य मध्यप्रदेश के समय, बिलासपुर जैसे बड़े जिले जिसके वर्तमान में 5 जिले और नए बन चुके है , उस बिलासपुर जिले के निर्माण समिति के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाल चुके वचन साय का कमाल ये रहा है की 15 साल भाजपा का शासन रहने के बावजूद भाजपा कभी पाली तानाखार मे अपना परचम नहीं लहरा सकी है, जिसका एक प्रमुख कारण राजनीती के भीष्म पितामह कहे जाने वाले वचन साय कोराम एक फौलादी दीवार की तरह तानाखार में कांग्रेस को अडिग रख कर, कांग्रेस का अभेदगढ़ बनाने मददगार रहे।
गोंडवाना के सुप्रीमो कहे जाने वाले स्वर्गीय दादा हीरासिंह मरकाम भी वचन साय से लोहा लेने में घबराते रहे। वचन साय के प्रत्याशी बनने से, पाली तानाखार और आस पास के विधानसभा में इसका प्रतिकूल असर पड़ने की सम्भावना है। राजनीती के चाणक्य स्वर्गीय अजित जोगी भी वचन साय जैसे महारथी से सलाह मश्वरा लिया करते थे एवं मुख्यमंत्री बनने के बाद सबसे पहला दौरा वचन साय के गृहग्राम में किया था।
गोंड समाज के दिग्गज कांग्रेसी नेता की खोज प्रदेश को पाली तानाखार में लम्बे समय से रही है।
वचन साय के दावेदारी करने से कांग्रेस के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष रामदयाल उइके के जाने से रिक्त हुई जगह वचन साय भर सकते है , प्रदेश नेतृत्व वचन साय की दावेदारी को लेकर गंभीरता से विचार कर रहा है। प्रदेश के प्रभारी कुमारी शैलजा एवं चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष चरणदास महंत से मिलकर वचन साय अपनी दावेदारी दर्शा चुके है। उनके दावेदारी पर प्रदेश में आमराय बन सकती है।
पाली तानाखार से किसे टिकट मिलता है ये तो भविष्य ही बताएगा लेकिन वचन साय की मजबूत दावेदारी को नाकारा नहीं जा सकता क्यूंकि पाली तानाखार से जुड़े लगभग 8 विधानसभा मे गोंड समाज बहुलता है जिसका प्रभाव प्रदेश की राजनीती में पड सकता है।

