कोरबा / पसान // इन दिनों पसान में अवैध कब्जों की होड़ लगी हुई है। चाहे वह जमीन राजस्व की हो, आबादी हो, घास हो या फिर शासकीय संस्थाओं की हो ,यहां तक की लोग पसान का एकमात्र निस्तारी दलसागर तालाब को भी नही छोड़ रहे है , ऐसा ही मामला शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला पसान का सामने आया है। जहाँ हो रहे बेजाकब्जा पर स्कूल के प्राचार्य अनील कुमार कोरी ने तहसीलदार को आवेदन देकर स्कूल की भूमि में हो रहे बेजाकब्जा को रोकने का निवेदन किया था ,पसान तहसीलदार आवेदन पर कार्यवाही तो दूर स्थल निरीक्षण करने का भी समय नही निकाल पा रहे हैं ,राजस्व विभाग के संरक्षण में स्कूल की जमीन पर बेजा कब्जा जोर शोर से चल रहा है ,

राजस्व विभाग ने कब्जाधारियों की बनाई सूची, पर नहीं की कार्रवाई
कब्जा हटवाने पूर्व प्रिंसिपल एम डी किरार ने की काफी मशक्कत की, मगर वे उसे खाली नहीं करा पाए। उन्होंने काफी लिखा-पढ़ी कर तहसील व अपने उच्चाधिकारियों को कब्जे हो रहे भूमि से अवगत कराते हुए सीमांकन के लिए तहसील कार्यालय में आवेदन लगाया। मगर राजस्व विभाग से स्कूल प्रशासन को कोई सहयोग नही मिला
विद्यालय के बने रंगमंच एवं शिक्षक क्वाटर पर हो रहा कब्जा
पसान का हाईस्कूल क्षेत्र का सबसे पुराना स्कूल है ,यहाँ लगभग सन 1950 से बने रंगमंच और उससे लगा विद्यालय का स्टाफ क्वाटर था जहाँ रंगमंच में विद्यालय की समस्त रंगमंच संबंधित गतिविधियों को संचालित किया जाता था ,वही खाली जगहों में खेलकूद आयोजित किया जाता रहा है ,कुछ जगहों में सागौन के पौधों का वृक्षारोपण किया गया था जो आज भी अपनी उपस्थिति की गवाही दे रहा है ,पर भू माफिया पर इस जगह पर नजर पड़ गई और बेजा कब्जा बदस्तूर जारी है ,

प्रिंसिपल के आवेदन में सिर्फ खानापूर्ति , प्रिंसिपल का कब्जाधारियों से सांठगांठ की बू
अनिल कुमार कोरी पसान स्कूल में लंबे समय से प्रिंसिपल की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे है एक उच्च पद पर बैठे अधिकारी के द्वारा तहसीलदार पसान को दिया गया आवेदन सिर्फ एक कोरम पूरा करने जैसा है ,क्या स्कूल में बैठे क्लर्क को यह नही मालूम की एक सरकारी संस्था के द्वारा कैसे आवेदन पत्र लिखा जाता है ,प्रिंसिपल ने सिर्फ लोगो को दिखाने के लिए आवेदन देकर अपना पल्ला झाड़ लिया है , वो ना स्वयं कब्जा हटवाने के इच्छुक हैं और न ही प्रशासन का सहयोग करने की उनकी मंशा है ,

