खड़ी फसल पर मौसम की मार: दिल्ली से यूपी तक बारिश का कहर, 19 राज्यों में तेज आंधी का अलर्ट

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CG City News

उत्तर भारत में मौसम ने एक बार फिर अचानक करवट ली है, जिससे किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, पंजाब समेत देश के 19 राज्यों में तेज आंधी, बारिश और कहीं-कहीं ओलावृष्टि का अलर्ट जारी किया है। बेमौसम बारिश का सबसे ज्यादा असर रबी की तैयार खड़ी फसलों पर पड़ रहा है।

मंगलवार को दिल्ली और आसपास के इलाकों में दोपहर बाद अचानक मौसम बदल गया। घने बादल छा गए, तेज हवाएं चलीं और कई जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। राजधानी में अधिकतम तापमान 33.7 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो सामान्य से थोड़ा अधिक रहा। हालांकि बारिश के चलते मौसम में ठंडक महसूस की गई। कुछ इलाकों में विजिबिलिटी कम होने के कारण दिन में ही वाहनों की लाइट जलाकर चलना पड़ा।

उत्तर प्रदेश और पंजाब में भी मौसम का मिजाज बिगड़ा हुआ है। पंजाब के कई जिलों में बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई, जिससे खेतों में खड़ी गेहूं और सरसों की फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। तेज हवाओं के कारण फसलें खेतों में गिर गई हैं, जिससे उनके खराब होने और उत्पादन घटने का खतरा बढ़ गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय रबी की फसलें कटाई के लिए तैयार रहती हैं, ऐसे में बारिश और नमी फसल की गुणवत्ता पर सीधा असर डालती है। गेहूं के दानों में नमी बढ़ने से फफूंद लगने की आशंका रहती है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

उधर, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में भी मौसम का असर देखने को मिल रहा है। कश्मीर के बारामुला जिले में भारी बारिश के चलते जलस्तर बढ़ने से एक स्कूल हॉस्टल में बाढ़ जैसे हालात बन गए, जहां फंसे 34 लोगों को सेना ने सुरक्षित बाहर निकाला। इसमें 30 छात्र और 4 शिक्षक शामिल थे। वहीं, गुरेज घाटी में हिमस्खलन की घटना भी सामने आई, हालांकि किसी तरह के जानमाल के नुकसान की सूचना नहीं है।

हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों में हल्का हिमपात हुआ है। रोहतांग, कुंजुम और बारालाचा दर्रे में बर्फबारी के कारण यातायात प्रभावित हुआ है, जबकि बीआरओ ने शिंकुला मार्ग को बहाल कर दिया है, जिससे तीन सप्ताह बाद जंस्कार घाटी का संपर्क मनाली से फिर जुड़ पाया है।

मौसम विभाग के अनुसार, अगले 24 से 48 घंटों तक उत्तर भारत के कई हिस्सों में मौसम ऐसा ही बना रह सकता है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे फसल की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएं और मौसम की ताजा जानकारी पर नजर बनाए रखें।


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