पत्नी के वाट्सएप चैट व कॉल रिकार्डिंग को माना जा सकता है सबूत, छत्तीसगढ़ HC ने सुनाया बड़ा फैसला

IMG-20230522-WA0021
previous arrow
next arrow
CG City News

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने वैवाहिक विवादों में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि पारिवारिक न्यायालय पत्नी के वाट्सएप चैट और काल रिकार्डिंग को पुख्ता साक्ष्य मान सकता है। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि निजता का अधिकार पूर्ण नहीं है और निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार सार्वजनिक न्याय से जुड़ा है, जो व्यक्तिगत निजता से ऊपर है। यदि ऐसे साक्ष्यों को रोका गया, तो पारिवारिक न्यायालय का उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा।

HighLights

  1. वैवाहिक विवादों में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य स्वीकार्य होंगे।
  2. पत्नी के वाट्सएप चैट, कॉल रिकॉर्डिंग मान्य सबूत।
  3. निजता से ऊपर निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार।

 छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने वैवाहिक विवादों में इलेक्ट्रानिक साक्ष्य को स्वीकार करने के संबंध में एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया है। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पत्नी के वाट्सएप चैट और काल रिकार्डिंग को पारिवारिक न्यायालय पुख्ता साक्ष्य के रूप में मान सकता है। यह भी कहा कि यदि निजता के नाम पर साक्ष्यों को रोका गया, तो पारिवारिक न्यायालय का उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा।

रायपुर निवासी एक व्यक्ति ने पत्नी से विवाह विच्छेद के लिए पारिवारिक न्यायालय में आवेदन दिया था। पति ने पत्नी की अन्य व्यक्तियों के साथ हुई वाट्सएप चैट और काल रिकार्डिंग को रिकार्ड पर लेने के लिए आवेदन दिया था।

पत्नी ने क्या आरोप लगाए?

पत्नी ने इसका विरोध करते हुए आरोप लगाया कि पति ने उसका मोबाइल हैक कर अवैध रूप से ये साक्ष्य जुटाए हैं, जो उसकी निजता के अधिकार का उल्लंघन है। परिवार न्यायालय ने पति की अर्जी को स्वीकार कर लिया, जिसे पत्नी ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।

पत्नी की याचिका को खारिज करते हुए जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की एकल पीठ ने कहा कि पारिवारिक न्यायालय के पास विशेष अधिकार है कि वह मामले के प्रभावी निपटारे के लिए किसी भी दस्तावेज या जानकारी को साक्ष्य के रूप में स्वीकार कर सकता है, भले ही वह सामान्यत: एविडेंस एक्ट के तहत स्वीकार्य न हो।

हाई कोर्ट ने SC के निर्णयों का दिया हवाला

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के निर्णयों का हवाला देते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि यदि साक्ष्य प्रासंगिक है, तो यह महत्वपूर्ण नहीं है कि उसे किस प्रकार से प्राप्त किया गया है। अदालतों को दोनों पक्षों के हितों के बीच संतुलन बनाना होता है। पति को अपनी बात साबित करने के लिए प्रासंगिक साक्ष्य पेश करने का अवसर मिलना चाहिए।

हाई कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत निजता का अधिकार पूर्ण नहीं है। निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार सार्वजनिक न्याय से जुड़ा है और यह निजता के व्यक्तिगत अधिकार से ऊपर है। यदि निजता के नाम पर साक्ष्यों को रोका गया, तो पारिवारिक न्यायालय का उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा।


CG City News

Related Articles

[td_block_social_counter facebook="tagdiv" twitter="tagdivofficial" youtube="tagdiv" style="style8 td-social-boxed td-social-font-icons" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLWJvdHRvbSI6IjM4IiwiZGlzcGxheSI6IiJ9LCJwb3J0cmFpdCI6eyJtYXJnaW4tYm90dG9tIjoiMzAiLCJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBvcnRyYWl0X21heF93aWR0aCI6MTAxOCwicG9ydHJhaXRfbWluX3dpZHRoIjo3Njh9" custom_title="Stay Connected" block_template_id="td_block_template_8" f_header_font_family="712" f_header_font_transform="uppercase" f_header_font_weight="500" f_header_font_size="17" border_color="#dd3333"]

Latest Articles

error: Content is protected !!