जीपीएम /13/01/26//अमरकंटक मैकल पत्रकार हमला
छत्तीसगढ़ के अमरकंटक–मैकल पर्वत श्रृंखला क्षेत्र में चल रहे अवैध खनन और जंगलों की खुलेआम लूट पर आवाज़ उठाना अब जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है। 8 जनवरी 2026 की शाम वरिष्ठ पत्रकार सुशांत गौतम पर किया गया हमला केवल एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि उस निर्भीक पत्रकारिता पर हमला है जो प्रकृति, जल और जंगलों की रक्षा के लिए खड़ी है।

🟢 अवैध खनन पर ग्राउंड रिपोर्टिंग से लौटते वक्त हमला
पत्रकार सुशांत गौतम उस दिन अमरकंटक और मैकल पर्वत क्षेत्र में अवैध खनन, क्रशर संचालन और पर्यावरणीय विनाश को लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग कर लौट रहे थे। उनके साथ पत्रकार साथी रितेश गुप्ता भी मौजूद थे।
सुशांत गौतम लंबे समय से इस संवेदनशील क्षेत्र में खनन माफिया की गतिविधियों को उजागर करते रहे हैं। हाल ही में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा अरावली हिल्स को बचाने के लिए अपनाए गए सख्त रुख का हवाला देते हुए यह सवाल उठाया था कि यदि अरावली को बचाया जा सकता है, तो अमरकंटक और मैकल पर्वत श्रृंखला क्यों नहीं?
यही सवाल खनन माफिया को नागवार गुज़रा।
🟢 हाईवा, फोर व्हीलर और कार से रची गई घात
जैसे ही उनकी गाड़ी जीपीएम जिले के धनौली गांव के पास पहुंची, एक सफेद कार अचानक सामने आकर रास्ता रोककर खड़ी हो गई। उसी समय साइड में एक हाईवा, पीछे से एक फोर-व्हीलर आकर रुकी। देखते ही देखते उनकी गाड़ी को चारों तरफ से घेर लिया गया।
यह कोई सड़क हादसा नहीं था, बल्कि पूर्व नियोजित हमला था।
हमलावरों ने गालियां दीं, धमकियां दीं और चिल्लाते हुए कहा —
“दरवाज़ा खोल, बाहर उतर।”
🟢 लोहे की रॉड से हमला, कांच चकनाचूर
इसी दौरान एक हमलावर ने लोहे की रॉड से ड्राइवर साइड के कांच पर जोरदार वार किया। कांच पूरी तरह टूट गया और उसके टुकड़े पत्रकार सुशांत गौतम के चेहरे और माथे में जा लगे।
हमले में वे गंभीर रूप से घायल हो गए और खून बहने लगा। हालात ऐसे बन गए कि जान का सीधा खतरा पैदा हो गया।
यह हमला किसी तात्कालिक गुस्से का नतीजा नहीं था, बल्कि सोची-समझी साजिश के तहत किया गया जानलेवा प्रयास था।
मोबाइल छीना गया ताकि सबूत न बचे
सबसे गंभीर बात यह रही कि इसी दौरान उनके सहयोगी रितेश गुप्ता का मोबाइल फोन जबरन छीन लिया गया और बंद कर दिया गया, ताकि वे किसी से संपर्क न कर सकें और वीडियो रिकॉर्डिंग न बच सके। सुशांत गौतम के मोबाइल के साथ भी जबरदस्ती की गई।
यह साफ बताता है कि हमला सिर्फ डराने के लिए नहीं था — यह सबूत मिटाने और खबर दबाने की कोशिश थी।

FIR दर्ज, हत्या की कोशिश का मामला
घटना के बाद सुशांत गौतम सीधे गौरेला थाना पहुंचे और लिखित शिकायत दी। पुलिस ने FIR नंबर 0014/2026 दर्ज किया है। इसमें भारतीय न्याय संहिता की धाराएँ लगाई गई हैं जो हत्या की कोशिश, खतरनाक हथियार से हमला, आपराधिक धमकी और सामूहिक अपराध जैसे गंभीर अपराधों को दर्शाती हैं।
यह कोई साधारण केस नहीं है। यह संज्ञेय और गंभीर अपराध है।
🟢 मेडिकल रिपोर्ट और सबूत पुलिस के पास
घायल पत्रकार का मेडिकल परीक्षण कराया गया है। उनके चेहरे पर आई चोटों की तस्वीरें और वीडियो सहित सभी साक्ष्य पुलिस को सौंप दिए गए हैं।
अब सवाल यह है कि क्या कानून अवैध खनन माफिया के आगे खड़ा होगा या फिर सच लिखने वालों को इसी तरह चुप कराने की कोशिशें जारी रहेंगी?
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