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Thursday, April 16, 2026

मांगे नहीं मानी तो 23 फरवरी को जिला मुख्यालय पर होगा धरना

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CG City News

भाखड़ा विस्थापितों की मांगों को लेकर तेज हुई हलचल

आज भी भूमि, आवास, बिजली, पानी जैसी सुविधाओं से वंचित हैं विस्थापित

झंडूता (बिलासपुर)। जिला ग्रामीण भाखड़ा विस्थापित सुधार समिति के आह्वान पर रविवार को नगराओं और नारल सहित विभिन्न स्थानों पर बैठकें हुईं। अध्यक्षता रोहल पंचायत के प्रधान राज कुमार ने की, समिति के प्रधान देशराज शर्मा मुख्यातिथि के रूप में उपस्थित रहे। बैठक में निर्णय लिया गया कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर शीघ्र उचित कदम नहीं उठाया, तो 23 फरवरी को जिला मुख्यालय बिलासपुर में शांतिपूर्ण लेकिन विशाल धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
देशराज शर्मा ने कहा कि भाखड़ा बांध बने 65 वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन विस्थापित आज भी भूमि, आवास, बिजली, पानी और अन्य मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। उन्होंने कहा कि अशिक्षा और जानकारी के अभाव में कई विस्थापित परिवारों ने अन्य स्थानों पर अपने घर बना लिए, जबकि उन्हें भूमि कहीं और आवंटित कर दी गई थी। इस कारण वे आज दोबारा विस्थापन के खतरे का सामना कर रहे हैं। देशराज शर्मा ने मांग की कि भाखड़ा विस्थापित बहुल क्षेत्रों में मिनी बंदोबस्त कर लोगों के कब्जे वाली भूमि का मालिकाना हक दिया जाए और जिन विस्थापितों को अभी तक प्लॉट या भूमि नहीं मिली है, उन्हें तुरंत आवंटित किया जाए। उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर विस्थापितों के बिजली और पानी के कनेक्शन काट दिए गए हैं, जिन्हें तत्काल बहाल किया जाना चाहिए। साथ ही गोविंद सागर झील से सिंचाई और पेयजल की समुचित व्यवस्था की मांग भी उठाई गई।

बैठक में जिला प्रशासन द्वारा अतिरिक्त उपायुक्त की अध्यक्षता में गठित कमेटी का स्वागत तो किया गया, लेकिन समिति ने इसके स्थान पर सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र कमेटी गठित करने की मांग रखी। समिति का कहना है कि अतिरिक्त उपायुक्त पर पहले से कार्यभार अधिक है, जिससे विस्थापितों की समस्याओं को प्राथमिकता नहीं मिल पाएगी। कमेटी में विस्थापितों को भी सदस्य बनाए जाने की मांग की गई। इसके अलावा भाखड़ा विस्थापितों और प्रभावितों के वारिसों को बीबीएमबी में रोजगार, प्रदेश सरकार को रॉयल्टी के रूप में मिलने वाली 7.19 प्रतिशत राशि में से 25 प्रतिशत भाखड़ा विस्थापितों की मूलभूत सुविधाओं पर खर्च करने, भाखड़ा विस्थापितों को पौंग विस्थापितों की तर्ज पर सभी सुविधाएं देने की मांग दोहराई गई। गोविंद सागर झील पर ज्योरीपतन, बुखर-कोसरियां, बैरी-दड़ोलां और डेहणं-नारल में पुलों के निर्माण, मछुआरों के लिए कल्याणकारी योजनाएं लागू करने और बिलासपुर को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की मांग भी प्रमुख रही। बैठक में निर्णय लिया गया कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर शीघ्र उचित कदम नहीं उठाया, तो 23 फरवरी को जिला मुख्यालय बिलासपुर में शांतिपूर्ण लेकिन विशाल धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। इस अवसर पर समिति के सचिव चिरंजी लाल शर्मा सहित बख्शी राम, भगत राम, सुंदर राम, शकुंतला देवी, नगरजू देवी, असलम, गीता देवी, ओंकार सिंह सहित अन्य लोग मौजूद रहे।


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