चार साल बाद रिश्तों को संभालने की कोशिश
भारत और चीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव के बीच एक बार फिर कूटनीतिक बातचीत तेज होती दिख रही है। पूर्वी लद्दाख में करीब चार वर्षों तक चले सैन्य गतिरोध के बाद दोनों देशों ने अपने रिश्तों को स्थिर करने की दिशा में अहम कदम उठाए हैं। इसी क्रम में विदेश सचिव विक्रम मिसरी और चीन के कार्यकारी विदेश उपमंत्री मा झाओक्सू के बीच हुई बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
व्यापारिक असंतुलन बना बड़ी चुनौती
बैठक में भारत-चीन व्यापार से जुड़ी चिंताओं पर खुलकर चर्चा हुई। भारत लंबे समय से चीन के साथ बढ़ते व्यापार घाटे और कुछ संवेदनशील क्षेत्रों में निर्भरता को लेकर चिंता जताता रहा है। खास तौर पर रेयर अर्थ मिनरल्स और तकनीकी उपकरणों के निर्यात पर चीन के नियंत्रण ने भारत की चिंता बढ़ाई है।
सीमा पर शांति को बताया रिश्तों की कुंजी
दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि जब तक सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और यथास्थिति बनी रहेगी, तब तक द्विपक्षीय संबंधों में सुधार संभव नहीं है। पूर्वी लद्दाख में सैनिकों की तैनाती और तनाव ने रिश्तों को गहरा झटका दिया था।
एयर सर्विस एग्रीमेंट पर सहमति
बैठक में एक अपडेटेड एयर सर्विस एग्रीमेंट को जल्द अंतिम रूप देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। इससे दोनों देशों के बीच लोगों के आवागमन और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
कैलाश मानसरोवर यात्रा से बढ़ी सकारात्मकता
विदेश सचिव मिसरी ने कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे लोगों के बीच संपर्क मजबूत होगा। भारत इसे रिश्तों में आई सकारात्मकता के संकेत के रूप में देख रहा है।
ब्रिक्स मंच पर भी संवाद
चीन के उप विदेश मंत्री झाओक्सू भारत में ब्रिक्स शेरपा बैठक में हिस्सा लेने आए हैं। ऐसे बहुपक्षीय मंचों पर बातचीत से दोनों देशों को मतभेद कम करने का अवसर मिल रहा है।
आगे की राह
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह बातचीत रिश्तों को सामान्य बनाने की दिशा में एक जरूरी कदम है, लेकिन वास्तविक सुधार तभी संभव होगा जब सीमा विवाद का स्थायी समाधान निकले और व्यापार में संतुलन बने।


