Raigarh
इस अनोखी शादी की परंपरा के दौरान मंडप में बकरे की बलि देते ही घर के मुखिया पर देवता सवार हो जाता है और फिर वह नाचते-झुमते जलते हुए अंगारो को मंडप पर बिछाना शुरू कर देता है। जिस पर वह स्वयं, दुल्हा, नई दुल्हन के अलावा परिवार के अन्य सदस्य नंगे पैर चलकर फेरे लेते हैं इसके बावजूद उनके पैरों में जरा भी जख्म नही होता, जो कि अपने आप में आश्चर्य की बात है।
परिवार के सदस्य रहते हैं उपवास
राठिया परिवार के सदस्यों ने बताया कि परिवार के कई सदस्य आज सुबह से उपवास हैं। दुल्हन को अपने घर लाने के बाद घर के बाहर पहले एक बकरे की बलि देने के बाद बकरे की खून से तिलक लगाकर दूल्हा- दुल्हन को घर में प्रवेश कराया गया, उसके बाद दुल्हे के मंडप के नीचे देवी देवताओं की पूजा अर्चना करके दूसरे बकरे की बलि देने के बाद घर के कई सदस्यों ने अंगारों में चलने की परंपरा को निभाया।
कई साल से चली आ रही परंपरा
गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि बिलासपुर गांव की जनसंख्या तकरीबन 11 सौ के आसपास है और इस गांव में राठिया परिवार के गंधेल गोत्र के दो ही परिवार हैं। उनका कहना है कि वे लोग अपने बचपन से देखते आ रहे हैं जब भी इस परिवार में शादी होती है, दुल्हा, दुल्हन और परिवार के कई सदस्य अंगारों में चलकर इस परंपरा को निभाते आ रहे हैं।
दी जाती है दो बकरों की बलि
शादी के बाद दूल्हा जब दुल्हन लेकर अपने गांव लौटता है, तब उन्हें घर के बाहर ही किसी और की परछी में घंटों तक भूखे प्यासे ही रुकाया जाता है, जिसके बाद बकरे की बलि देकर खून से तिलक लगाकर दुल्हा और नई दुल्हन को घर में प्रवेश कराया जाता है। इस अनोखी परंपरा को देखने दूसरे गांव से भी लोग भारी संख्या में पहुंचते हैं।
परंपरा निभाना क्यों जरूरी
हमारे संवाददाता ने राठिया परिवार के सदस्यों से इस अनोखी परंपरा को कई दशकों से आज तक मनाने के संबंध में पूछने पर उन्होंने बताया कि इस परंपरा को नहीं मनाने पर उनके घर के देवी देवता नाराज हो जायेंगे और परिवार में कुछ अनिष्ठ हो सकता है। इस लिहाज से उनका पूरा परिवार यह परंपरा निभाते आ रहा है और आगे भी निभाते रहेंगे।

