चुनाव से पहले सियासी माहौल गरम
राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले ओडिशा की राजनीति में बड़ा विवाद सामने आया है। कांग्रेस ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उसके विधायकों को क्रॉस वोटिंग कराने के लिए पांच-पांच करोड़ रुपये की रिश्वत देने की कोशिश की गई। इस मामले में बेंगलुरु पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार भी किया है। घटना सामने आने के बाद राजनीतिक माहौल काफी गरमा गया है और दोनों दल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं।
कांग्रेस का आरोप: विधायकों को खरीदने की कोशिश
ओडिशा कांग्रेस का कहना है कि राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग की आशंका को देखते हुए उसने अपने आठ विधायकों को बेंगलुरु भेजा था। इन विधायकों को वहां सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी कर्नाटक के उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को सौंपी गई थी। कांग्रेस का आरोप है कि इसी दौरान कुछ लोग होटल में पहुंचे और विधायकों से संपर्क कर उन्हें प्रति वोट पांच करोड़ रुपये देने की पेशकश की।
कांग्रेस नेताओं के अनुसार, यह पूरी कोशिश भाजपा से जुड़े लोगों की ओर से की गई थी ताकि राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के विधायकों से क्रॉस वोटिंग कराई जा सके।
होटल में पहुंचकर की गई बातचीत
कांग्रेस नेताओं ने बताया कि चार लोग होटल में पहुंचे थे, जहां ओडिशा के कांग्रेस विधायक ठहरे हुए थे। इन लोगों ने एक स्थानीय व्यक्ति की मदद से होटल में कमरा बुक कराया और फिर वहां मौजूद विधायकों से मिलने की कोशिश की।
बताया गया कि सुबह के समय इन लोगों ने एक विधायक से मुलाकात की और उन्हें पांच करोड़ रुपये देने की पेशकश की। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह सीधे-सीधे लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश है।
पुलिस की कार्रवाई
मामले की जानकारी मिलते ही बेंगलुरु पुलिस सक्रिय हो गई। पुलिस ने जांच शुरू की और इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के दौरान कुछ और नाम भी सामने आए हैं।
कांग्रेस नेताओं के अनुसार, जिन लोगों को हिरासत में लिया गया है उन्होंने पूछताछ के दौरान कुछ अन्य व्यक्तियों का भी नाम लिया है। इनमें ओडिशा के कुछ कारोबारी और राजनीतिक रूप से सक्रिय लोग शामिल बताए जा रहे हैं।
निर्दलीय उम्मीदवार का नाम भी आया सामने
कांग्रेस नेता सप्तगिरी उलाका ने दावा किया कि पूछताछ के दौरान गिरफ्तार लोगों ने भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप राय का नाम लिया है। उलाका के अनुसार, जिस होटल में विधायक ठहरे थे, वह भी दिलीप राय का बताया जा रहा है।
कांग्रेस का कहना है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं।
भाजपा ने आरोपों को बताया झूठा
दूसरी ओर भाजपा ने कांग्रेस के सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस राज्यसभा चुनाव में संभावित हार को देखते हुए इस तरह के आरोप लगा रही है।
ओडिशा भाजपा के प्रवक्ता अनिल बिस्वाल ने कहा कि कांग्रेस के आरोप निराधार हैं और इसका कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा का इस पूरे मामले से कोई लेना-देना नहीं है।
राजनीतिक टकराव और तेज
इस घटना के बाद ओडिशा की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। कांग्रेस जहां इसे लोकतंत्र को कमजोर करने की साजिश बता रही है, वहीं भाजपा इसे कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति करार दे रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि राज्यसभा चुनाव के दौरान अक्सर क्रॉस वोटिंग की आशंका रहती है और इसी कारण कई दल अपने विधायकों को दूसरे राज्यों में भेजकर सुरक्षित रखने की रणनीति अपनाते हैं।
आगे क्या होगा?
अब सबकी नजर इस मामले की जांच और राज्यसभा चुनाव के परिणाम पर टिकी हुई है। यदि जांच में किसी राजनीतिक दल की भूमिका सामने आती है तो यह विवाद और भी बड़ा रूप ले सकता है।
फिलहाल इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या भारतीय राजनीति में चुनाव के दौरान विधायकों को प्रभावित करने की कोशिशें अब भी जारी हैं।


