दूधनोई/असम
4 अप्रैल — असम विधानसभा चुनाव से पहले केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर UCC लागू होता है तो “घुसपैठिए चार शादियां नहीं कर पाएंगे।” शाह ने यह टिप्पणी असम के गोलपाड़ा जिले के दूधनोई में आयोजित एक चुनावी रैली के दौरान की, जहां उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए समर्थन जुटाने की अपील की।
रैली में बोलते हुए शाह ने कहा कि Narendra Modi के नेतृत्व में केंद्र सरकार और Himanta Biswa Sarma की राज्य सरकार ने असम के विकास और शांति के लिए ठोस कदम उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकार ने राज्य में लंबे समय से चले आ रहे अस्थिरता के दौर को खत्म कर स्थिरता स्थापित की है।
UCC और आदिवासी क्षेत्रों पर स्पष्टता
अमित शाह ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि UCC लागू होने पर आदिवासी समुदायों की परंपराओं को ध्यान में रखा जाएगा और उनके क्षेत्रों को इससे बाहर रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार आदिवासी समाज की पहचान और परंपराओं की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
शाह ने इस दौरान देश में पहली बार एक आदिवासी महिला को राष्ट्रपति बनाए जाने का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि Droupadi Murmu को राष्ट्रपति बनाना भाजपा की आदिवासी समाज के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
घुसपैठ पर सख्त रुख
गृह मंत्री ने घुसपैठ के मुद्दे को भी जोर-शोर से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि सीमावर्ती इलाकों में घुसपैठियों द्वारा स्थानीय जनसंख्या के बीच सामाजिक और राजनीतिक संतुलन बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है। शाह ने कहा कि कुछ इलाकों में घुसपैठिए आदिवासी महिलाओं से विवाह कर प्रभाव बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे सामाजिक तनाव पैदा हो रहा है।
उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि भाजपा को दोबारा सत्ता मिलती है, तो राज्य से अवैध घुसपैठ को पूरी तरह समाप्त किया जाएगा और ऐसे लोगों को वापस भेजने की प्रक्रिया तेज की जाएगी।
विकास और शांति का वादा
अपने संबोधन के अंत में अमित शाह ने जनता से भाजपा को फिर से सत्ता में लाने की अपील करते हुए कहा कि विकास की गति और शांति बनाए रखने के लिए स्थिर सरकार जरूरी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस, मजबूत होती है तो राज्य में फिर से अस्थिरता लौट सकती है।
चुनाव कार्यक्रम
गौरतलब है कि असम में विधानसभा चुनाव के तहत 9 अप्रैल को मतदान होना है, जबकि मतगणना 4 मई को की जाएगी। चुनावी माहौल के बीच सभी दल अपनी-अपनी रणनीति के साथ मैदान में हैं, लेकिन भाजपा ने विकास, सुरक्षा और सांस्कृतिक पहचान जैसे मुद्दों को केंद्र में रखा है।


