नई दिल्ली
महिला आरक्षण विधेयक को लेकर देश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मुख्य विपक्षी दल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि वह इस विधेयक का समर्थन करेगी, लेकिन लोकसभा सीटों के परिसीमन से जुड़े सरकार के प्रस्तावित समानुपातिक फार्मूले का विरोध करेगी। पार्टी का कहना है कि यह फार्मूला राज्यों के बीच संतुलन को बिगाड़ सकता है और इससे कई राज्यों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
कांग्रेस का मानना है कि महिला आरक्षण लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है, लेकिन इसे परिसीमन जैसे संवेदनशील मुद्दे से जोड़ना उचित नहीं है। पार्टी नेताओं ने कहा कि सीटों की संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव के पीछे जो गणित रखा जा रहा है, वह राज्यों के बीच वर्तमान तुलनात्मक संतुलन को बदल देगा।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इस मुद्दे पर चिंता जताते हुए कहा कि यदि समानुपातिक फार्मूला लागू किया गया तो उत्तर और दक्षिण भारत के राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व का अंतर और अधिक बढ़ जाएगा। उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि अगर उत्तर प्रदेश में लोकसभा सीटें 80 से बढ़कर 120 हो जाती हैं और केरल में 20 से बढ़कर 30, तो दोनों राज्यों के बीच सीटों का अंतर 60 से बढ़कर 90 हो जाएगा। यह स्थिति दक्षिणी राज्यों के साथ-साथ छोटे राज्यों के लिए भी चिंता का विषय है।
कांग्रेस का तर्क है कि इस तरह के बदलाव से उत्तर भारत के राज्यों की राजनीतिक ताकत और अधिक बढ़ जाएगी, जबकि दक्षिण और पूर्वोत्तर के राज्यों की हिस्सेदारी तुलनात्मक रूप से कमजोर हो सकती है। पार्टी ने कहा कि वह राज्यों के बीच मौजूदा संतुलन में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ के खिलाफ है।
इसके अलावा कांग्रेस ने संसद का विशेष सत्र बुलाने के समय पर भी सवाल उठाए हैं। जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि यह सत्र आगामी चुनावों को प्रभावित करने के उद्देश्य से बुलाया गया है। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों ने पहले ही सर्वदलीय बैठक की मांग की थी, लेकिन सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया और एकतरफा निर्णय लिया।
कांग्रेस ने यह भी कहा कि परिसीमन से जुड़े मुद्दे पर अब तक सरकार की ओर से कोई स्पष्ट और औपचारिक जानकारी नहीं दी गई है। पार्टी ने मांग की है कि इस विषय पर जल्दबाजी न करते हुए व्यापक सहमति बनाई जाए।
समग्र रूप से कांग्रेस का रुख साफ है—वह महिला आरक्षण का समर्थन करती है, लेकिन परिसीमन के प्रस्तावित फार्मूले को लेकर गंभीर आपत्तियां रखती है और इस पर व्यापक चर्चा की मांग कर रही है।

