कोलकाता: मुकुल रॉय, जो तृणमूल कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों में से एक और पार्टी के सबसे प्रभावशाली रणनीतिकारों में गिने जाते थे, उनका सोमवार तड़के कोलकाता के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वह 71 वर्ष के थे और लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उनके पुत्र शुभ्रांशु रॉय ने बताया कि रात करीब 1:30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।
https://cgcitynews.com
मुकुल रॉय का नाम बंगाल की राजनीति में एक मजबूत रणनीतिकार के रूप में लिया जाता था। उन्हें अक्सर ‘बंगाल की राजनीति का चाणक्य’ कहा जाता था। उन्होंने जनवरी 1998 में ममता बनर्जी के साथ मिलकर तृणमूल कांग्रेस की नींव रखी थी। पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और वामपंथ के लंबे शासन को चुनौती देने में उनकी अहम भूमिका रही।
राजनीतिक जीवन में उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। वे 2006 में राज्यसभा पहुंचे और 2009 से 2012 तक सदन में पार्टी के नेता रहे। इसके अलावा, यूपीए-2 सरकार के दौरान मार्च 2012 में उन्होंने रेल मंत्री का पद संभाला। इससे पहले वे जहाजरानी राज्य मंत्री भी रह चुके थे। दिल्ली की राजनीति में भी उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती थी।
हालांकि उनका राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा। वर्ष 2017 में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया था, जिससे बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखा गया। 2021 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा के टिकट पर कृष्णनगर उत्तर से जीत हासिल की। लेकिन कुछ ही समय बाद जून 2021 में उन्होंने फिर से तृणमूल कांग्रेस में वापसी कर ली।
पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य कारणों के चलते वे सक्रिय राजनीति से दूर थे। उनके निधन की खबर से पश्चिम बंगाल ही नहीं, बल्कि पूरे देश के राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत कई नेताओं ने उनके निधन पर गहरा दुख जताया है। पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि मुकुल रॉय का जाना सिर्फ एक नेता का जाना नहीं है, बल्कि बंगाल की राजनीति के एक महत्वपूर्ण अध्याय का अंत है।
https://youtube.com/@cgcitynews.24kviws?si=2-HgXB_3QCltxnQl

