बस्तर का धुड़मारास और मांझीपाल बना नया पर्यटन केंद्र, प्रकृति और संस्कृति का अनोखा संगम

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बस्तर का आदिवासी अंचल धुड़मारास और मांझीपाल गांव अब पर्यटन का नया केंद्र बन रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन द्वारा सर्वश्रेष्ठ गांव घोषित धुड़मारास में कांगेर नाले में राफ्टिंग और कयाकिंग का अनुभव मिलता है। स्थानीय युवाओं द्वारा संचालित होम-स्टे और पारंपरिक भोजन यहां की पहचान हैं। यह क्षेत्र प्रकृति और संस्कृति का अनूठा संगम प्रस्तुत करता है।

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HighLights

  1. धुड़मारास UNWTO द्वारा सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव घोषित
  2. कांगेर नाले में राफ्टिंग, कयाकिंग का अनूठा अनुभव
  3. स्थानीय होम-स्टे, पारंपरिक भोजन बस्तर संस्कृति दर्शाते

अगर यात्रा आपके लिए सिर्फ जगहें देखने का नहीं, बल्कि खुद से मिलने का तरीका है, तो बस्तर आपकी अगली मंजिल हो सकती है। छत्तीसगढ़ का यह आदिवासी अंचल आज भी उस भारत को सहेजे हुए है, जहां प्रकृति और मनुष्य के बीच कोई दीवार नहीं है। कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान की परिधि में बसे धुड़मारास और मांझीपाल जैसे गांव आज बस्तर की उसी शांत, सजीव और आत्मीय पहचान को सामने ला रहे हैं, जिसकी तलाश में देश-दुनिया के सैलानी यहां पहुंच रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन द्वारा सर्वश्रेष्ट पर्यटन गांव घोषित धुड़मारास पहुंचते ही सबसे पहले ध्यान खींचती है कांगेर नाले की शांत, स्वच्छ जलधारा। बांस से बनी राफ्ट पर बहते हुए यह अहसास होता है कि यहां का रोमांच चीख-पुकार वाला नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ कदम मिलाकर चलने वाला है। चारों ओर साल और सागौन के घने जंगल, पक्षियों की आवाज़ और ऊपर फैला खुला आकाश-सब मिलकर समय की रफ्तार को जैसे धीमा कर देते हैं। युवाओं के बीच लोकप्रिय हो रही कयाकिंग भी यहां अलग अनुभव देती है।

हर पैडल स्ट्रोक के साथ नदी, जंगल और पहाड़ और करीब आते जाते हैं। सुबह जब जंगल से हल्की धुंध उठती है और सूरज की किरणें पत्तों के बीच से छनकर आती हैं, तो महसूस होता है कि यहां सांस लेना भी एक अनुभव है। शहर की थकान और बेचैनी यहां स्वतः ही उतर जाती है।

फोटो: बस्तर जिले के धुड़मारास में कांगेर नाले की शांत धारा पर कयाकिंग करते पर्यटक

जहां ठहरना भी याद बन जाता है

धुड़मारास व मांझीपाल गांव में स्थानीय आदिवासी युवाओं द्वारा संचालित होम-स्टे बस्तर पर्यटन की नई, सकारात्मक तस्वीर पेश कर रहे हैं। धुड़मारास होम-स्टे में आदिवासी युवा मानसिंह बघेल सैलानियों के स्वागत, मार्गदर्शन और स्थानीय अनुभवों को साझा करने में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। वहीं मांझीपाल होम-स्टे के संचालक सतीश रजनीश अपने परिवार के साथ मिलकर मेहमानों की मेजबानी करते हैं। मिट्टी और लकड़ी से बने घर, सादगी से सजा आंगन और हर समय मुस्कराते चेहरे, यहां ठहरते हुए लगता है कि आप पर्यटक नहीं, बल्कि घर आए कोई परिचित हैं। यहां रात को जंगल की खामोशी, झींगुरों की आवाज़ और ऊपर तारों भरा आसमान-शहरों की भागदौड़ से आए मन को गहरी नींद और सच्चा सुकून देता है।

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यहां थाली स्वाद संग संस्कृति है

यहां का भोजन किसी मेन्यू की सूची नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा है। सरगी के पत्ते या मिट्टी से बने बर्तनों में चापड़ा चटनी की तीखी सादगी, जंगल से आए कंद-मूल, देसी मुर्गा, ताज़ी सब्जियां, महुआ से बने व्यंजन और सल्फी-लांदा जैसे पारंपरिक पेय-हर स्वाद बस्तर की संस्कृति की कहानी कहता है। यह भोजन पेट से ज्यादा मन को तृप्त करता है।

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बस्तर में और क्या-क्या देखें

धुड़मारास-मांझीपाल की यात्रा को बस्तर के अन्य प्राकृतिक और सांस्कृतिक स्थलों के साथ जोड़ा जा सकता है। कोटमसर और कैलाश गुफाओं की रहस्यमयी दुनिया, चित्रकोट, तीरथगढ़ और तामड़ा घुमर जलप्रपात, दंतेवाड़ा का मां दंतेश्वरी मंदिर, बारसूर के प्राचीन मंदिर, ढोलकल गणेश तक ट्रैकिंग और साप्ताहिक जनजातीय हाट। यह सब मिलकर बस्तर को एक संपूर्ण पर्यटन अनुभव बनाते हैं।

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ऐसे पहुंचे और यहां रुके

नजदीकी रेलवे स्टेशन रायपुर से 300 किमी दूर स्थित जगदलपुर तक नियमित बस सेवाएं उपलब्ध हैं। रायपुर एयरपोर्ट से सड़क मार्ग द्वारा लगभग 7–8 घंटे की यात्रा आपको मैदानों से जंगल और फिर पहाड़ों की दुनिया में ले जाती है। जगदलपुर से लगभग 35 किलोमीटर दूर धुड़मारास और मांझीपाल गांव सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचे जा सकते हैं। आप होम स्टे के अलावा चित्रकोट जलप्रपात के पास स्थित पर्यटन मंडल के होटल व जगदलपुर के होटल का विकल्प भी चुन सकते हैं।

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