कोरबा // पसान // सरकार ने ग्रामीणों को आर्थिक संकट से उबारने महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना चालू की परंतु यह योजना विभागीय कर्मचारियों के लिए कमाई का जरिया बन गया ऐसा ही एक मामला तालाब गहरीकरण का सामने आया है जहां रोजगार सहायक द्वारा मजदूरों के साथ जनप्रतिनिधि ,व्यापारियों ,रसूखदारों का नाम मस्टरोल में दर्ज कर लाखो का बंदरबांट किया है ,

मामला पोड़ी उपरोड़ा के ग्राम पंचायत पसान का है जहां दलसागर तालाब गहरीकरण का कार्य मनरेगा से स्वीकृत हुआ था ,रोजगार सहायक पसान आनंद राम द्वारा तालाब गहरीकरण का कार्य शुरू करा दिया उन्होंने विकासखंड मुख्यालय के रोजगार गारंटी शाखा में मांग पत्र जमा कर मस्टररोल भी हासिल कर लिया ,इस मस्टररोल में पंचो के साथ – साथ व्यवसायी एवं रसूखदारों की हाजिरी मस्टरोल में दर्ज कर लाखों का वाउचर तैयार कर लिया और इसे कार्यालय में जमा कर लाखो रुपये का बंदरबांट किया गया

सरपंचों और रोजगार सहायकों की मिलीभगत से बर्बाद हो गई मनरेगा योजना
मनरेगा का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण परिवारों के वयस्क सदस्यों को साल में सौ दिन रोजगार देना था। मगर केंद्र की यह महत्त्वाकांक्षी योजना धीरे-धीरे भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती गई। धांधली होने लगी, फर्जी कार्ड बनने लगे। यह दुखद ही है कि ग्रामीण बेरोजगारों के लिए धरातल पर उतारी गई योजना पंचायतों, सरपंचों और रोजगार सहायको की मिलीभगत के कारण बर्बाद हो गई।

क्या जाँच में दोषी पाए जाने पर रोजगार सहायक पर होगी कार्यवाही ??
इस मामले की जाँच होने पर रोजगार सहायक का पूरा कारनामा सामने आने की संभावना है ,यह तालाब गहरीकरण तो मात्र एक भ्रष्टाचार का छोटा सा नमूना है ,रोजगार सहायक पसान के द्वारा सिर्फ पाँच साल में मनरेगा योजना के कराए कार्य की जाँच हो तो कई चौंकाने वाले कारनामे सामने आएंगे ,अब देखना है की इस मामले की जाँच में अगर रोजगार सहायक दोषी पाया जाता है तो इसके विरुद्ध क्या कार्यवाही होती है , या इसके आका इसे बचा ले जायेंगे ,

मामला संज्ञान में आया है , जाँच करा कर कार्यवाही की जायेगी — मेहता जी (पी ओ ) पोड़ी उपरोड़ा
रोजगार सहायक का कारनामा क्रमशः ::पढ़े अगले खबर में ,

