कोलकाता
मालदा जिले के कालियाचक में विरोध-प्रदर्शन के दौरान न्यायाधीशों को बंधक बनाए जाने की घटना ने न्यायिक व्यवस्था की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं खड़ी कर दी हैं। इस संवेदनशील मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की चिंता के बाद कलकत्ता हाई कोर्ट ने सक्रिय रुख अपनाया है। शुक्रवार को हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार और राज्य के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के बीच हुई अहम बैठक में जजों की सुरक्षा को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।
बैठक में राज्य के मुख्य सचिव दुष्यंत नारियावाला और गृह सचिव संघमित्रा घोष सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक का मुख्य फोकस उन न्यायाधीशों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था, जो इन दिनों मतदाता सूची से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रहे हैं। हालिया घटनाक्रम को देखते हुए कोर्ट ने सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने पर जोर दिया।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में न्यायाधीशों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती का मुद्दा भी उठाया गया। हालांकि, राज्य सरकार ने भरोसा दिलाया कि वह अपने स्तर पर पर्याप्त और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराएगी। अधिकारियों ने कहा कि किसी भी परिस्थिति में न्यायिक कार्य में बाधा नहीं आने दी जाएगी।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर कलकत्ता हाई कोर्ट ने राज्य के 23 जिलों में 19 ट्रिब्यूनल गठित किए हैं। इन ट्रिब्यूनल का नेतृत्व सेवानिवृत्त न्यायाधीश कर रहे हैं और इनका उद्देश्य उन नागरिकों की शिकायतों का निपटारा करना है, जिनके नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाए हैं।
मालदा की घटना के बाद इन ट्रिब्यूनलों में कार्यरत न्यायाधीशों की सुरक्षा को लेकर आशंकाएं और बढ़ गई थीं। ऐसे में हाई कोर्ट और राज्य सरकार दोनों ही इस मुद्दे पर सतर्क नजर आ रहे हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शनिवार से शुरू हो रही वर्चुअल सुनवाई के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना लोकतंत्र की मजबूती के लिए बेहद आवश्यक है। ऐसे मामलों में किसी भी तरह की चूक न केवल न्याय प्रक्रिया को प्रभावित करती है, बल्कि आम जनता के विश्वास को भी कमजोर कर सकती है।
फिलहाल, सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि राज्य सरकार और न्यायपालिका मिलकर किस तरह इस चुनौती का सामना करते हैं और न्यायिक कार्य को निर्बाध बनाए रखते हैं।

