कोरबा में आदिवासियों के कथित मतांतरण पर बवाल, संगठनों ने कलेक्टर-एसपी से की कार्रवाई की मांग

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CG City News

कोरबा:
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में आदिवासी समुदाय के कथित मतांतरण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। विभिन्न हिंदूवादी और सामाजिक संगठनों ने आरोप लगाया है कि लेमरू क्षेत्र में रहने वाले आदिवासियों, विशेषकर संरक्षित कोरवा जनजाति के लोगों को बहला-फुसलाकर धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है। इस मामले को लेकर गुरुवार को कई संगठनों के प्रतिनिधि कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक (एसपी) से मिले और जांच व कार्रवाई की मांग की।

प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि लेमरू क्षेत्र के खम्हून गांव सहित आसपास के इलाकों में सक्रिय कुछ ईसाई मिशनरी समूह ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा का लालच देकर अपने धर्म में शामिल करने का प्रयास कर रहे हैं। इस संबंध में लिखित शिकायत भी प्रशासन को सौंपी गई है।

इस विरोध प्रदर्शन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, सेवा भारती, हिंदू जागरण मंच सहित केवट समाज, साहू समाज, नेपाली समाज और जैन समाज जैसे कई संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इन सभी ने एकजुट होकर “हिंदू समाज” के बैनर तले आंदोलन चलाने का निर्णय लिया है।

प्रतिनिधियों में शामिल प्रकाश जैन ने आरोप लगाया कि “भोले-भाले आदिवासियों और अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों को योजनाबद्ध तरीके से निशाना बनाया जा रहा है। उन्हें आर्थिक मदद, इलाज और शिक्षा जैसी सुविधाओं का लालच देकर धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है, जो गलत है।” उन्होंने प्रशासन से ऐसे मामलों की गंभीर जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की।

हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि भारतीय संविधान हर नागरिक को अपने धर्म के प्रचार-प्रसार की स्वतंत्रता देता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि किसी पर दबाव डालकर या प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराया जाए।

दूसरी ओर, प्रशासन की ओर से अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार शिकायत की जांच शुरू कर दी गई है। स्थानीय पुलिस भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है ताकि किसी प्रकार का सामाजिक तनाव न बढ़े।

कोरबा में इस मुद्दे को लेकर माहौल संवेदनशील बना हुआ है। सामाजिक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे। वहीं प्रशासन के सामने चुनौती है कि वह निष्पक्ष जांच करते हुए कानून व्यवस्था बनाए रखे।

यह मामला एक बार फिर प्रदेश में धर्मांतरण के मुद्दे को चर्चा में ले आया है, जहां संतुलन बनाना प्रशासन के लिए एक बड़ी जिम्मेदारी बन गया है।


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