कोरबा // कोरबा जिले में अच्छी बारिश होने पर धान की फसल भी लहलहा रही है। दूसरी ओर तना छेदक के प्रभाव से नुकसान का भी खतरा है। तना छेदक रोपाई के 15 से 45 दिन बाद फसल में नजर आता है। इसके लिए किसानों को दवा का छड़काव करने सलाह दी है। चरपाली क्षेत्र में करीब 50 हेक्टेयर से अधिक फसल में इसका प्रकोप दिखने पर किसान दवा का छिड़काव भी कर रहे हैं। तना छेदक का प्रकोप फसल पर किसी भी अवस्था में हो सकता हैं। धान में तना छेदक के लिए गर्म और आद्र मौसम अनुकूल रहता है। इसमें तापमान 25 से 30 डग्री की बीच और आद्रता 70 से 80 प्रतिशत के बीच होने पर होता है। यह कीट के जीवनचक्र को तेज करती है। इसका प्रकोप बढ़ाता है। धान के पौधे में फूल आने और दाने भरने के समय भी नजर आता है। इससे पौधे मर जाते हैं। धान के पौधे पीले पड़ने लगते हैं।

कृषि विभाग के उपसंचालक डी.पी.एस. कंवर का कहना है कि किसानों को दवा छिड़काव करने की सलाह दी है। इसके साथ ही ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों को भी नजर रखने कहा है। समय पर दवा का छिड़काव होने से बीमारी का प्रकोप नहीं बढ़ता है।


