भारत का इकलौता बैराइट भंडार खतरे में, 10 साल से कम का बचा स्टॉक; ये क्या है और देश पर क्या पड़ेगा असर?

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India barytes reserves depletion: भारत का एकमात्र प्रमुख बैराइट भंडार तेजी से खत्म हो रहा है, जिससे देश की ऊर्जा सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। सेंटर फॉर डोमेस्टिक इकोनॉमी पॉलिसी रिसर्च की रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा रफ्तार से खनन जारी रहा तो भारत के पास 10 साल से भी कम समय के लिए बैराइट भंडार बचेगा। अब सवाल यह है कि आखिर बैराइट किस काम आता है?

India Barytes Reserves Depletion: भारत का एकमात्र प्रमुख बैराइट भंडार तेजी से खत्म हो रहा है और इसका सीधा असर देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है। सेंटर फॉर डोमेस्टिक इकोनॉमी पॉलिसी रिसर्च (C-DEP.in) की 17 दिसंबर 2025 को जारी रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि मौजूदा रफ्तार से खनन और निर्यात जारी रहा तो भारत के पास उपयोग योग्य बैराइट भंडार 10 साल से भी कम (India barytes reserves last 10 years) समय के लिए बचेंगे।

क्या है और किस काम आता है बैराइट?

बैराइट तेल और गैस ड्रिलिंग (barytes critical mineral oil gas drilling) के लिए बेहद अहम खनिज है। हाई-प्रेशर कुओं को सुरक्षित और स्थिर रखने में इसका कोई व्यवहारिक विकल्प नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर घरेलू बैराइट की उपलब्धता प्रभावित हुई तो अंडमान बेसिन और कृष्णा-गोदावरी बेसिन जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में भारत के तेल-गैस अन्वेषण कार्यक्रमों पर तुरंत असर पड़ेगा।

आंध्र प्रदेश के मंगमपेट में है इकलौती खदान

रिपोर्ट बताती है कि भारत के कुल बैराइट संसाधनों का लगभग 95% हिस्सा आंध्र प्रदेश की मंगमपेट खदान (Andhra Pradesh Mangampeta deposit exhaustion) में सिमटा हुआ है, जो देश का एकमात्र बड़ा और भरोसेमंद बैराइट भंडार है। यहां सिद्ध भंडार 2015 में 4.9 करोड़ टन थे, जो 2024 में घटकर 2.3 करोड़ टन से भी कम रह गए। यानी सिर्फ एक दशक में 53% भंडार खत्म हो चुके हैं। इसकी मुख्य वजह बिना किसी दीर्घकालिक रणनीति के लगातार बढ़ता निर्यात बताया गया है।

बैराइट खत्म होना राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा का सवाल

‘बैराइट भंडार के तीव्र क्षय के ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभाव का विश्लेषण’ (Analysis of the Impact of Rapid Depletion of Baryte Reserves on Energy Security) शीर्षक वाली यह रिपोर्ट आईआईटी दिल्ली (IIT Delhi barytes study 2025) में जारी की गई। इसे आंध्र प्रदेश मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (APMDC) के पूर्व प्रबंध निदेशक और सेवानिवृत्त IAS अधिकारी प्रवीण प्रकाश ने जारी किया।

उन्होंने कहा कि, “बैराइट का खत्म होना सिर्फ खनिज का मुद्दा नहीं है, यह राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा का सवाल है। भारत अपनी 90% से ज्यादा कच्चे तेल की जरूरत आयात से पूरी करता है। ऐसे में भविष्य की सुरक्षित ड्रिलिंग बैराइट पर ही निर्भर है।”

चाइनीज निर्यात सीमित करने भारत बना था सबसे बड़ा निर्यातक

रिपोर्ट के अनुसार, 2016 में चीन द्वारा निर्यात सीमित करने के बाद भारत दुनिया का सबसे बड़ा बैराइट निर्यातक बन गया। फिलहाल भारत, अमेरिका के कुल बैराइट आयात का करीब 44% सप्लाई करता है, जबकि उसके अपने भंडार अमेरिका, ईरान, कजाखस्तान और तुर्की जैसे देशों से काफी कम हैं। C-DEP के अध्यक्ष डॉ. जयजीत भट्टाचार्य का कहना है कि तेल उत्पादक देश बैराइट को दशकों के लिए बचाकर रख रहे हैं। भारत को भी ऐसा ही दूरदर्शी कदम उठाना होगा, नहीं तो भविष्य में रणनीतिक निर्भरता बढ़ेगी।

रिपोर्ट में सरकार से बैराइट निर्यात पर संतुलित रोक, APMDC के करीब 10,000 करोड़ रुपए के बॉन्ड दायित्वों के लिए वित्तीय ट्रांजिशन प्लान, निर्यात नीति में बदलाव और बैराइट को राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन (NCMM) में शामिल करने की सिफारिश की गई है।


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