कानपुर/ग्रेटर नोएडा:
उत्तर प्रदेश के कानपुर में सामने आए अवैध किडनी कारोबार मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। इस प्रकरण में ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित एक निजी अस्पताल के पूर्व ओटी (ऑपरेशन थिएटर) इंचार्ज राजेश को गिरफ्तार किया गया है। हैरानी की बात यह है कि राजेश ने एक महीने पहले ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके चलते किसी को उस पर शक तक नहीं हुआ।
पुलिस के अनुसार, 30 मार्च को कानपुर में स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई के दौरान इस अवैध किडनी रैकेट का खुलासा हुआ था। जांच में धीरे-धीरे इस गिरोह के तार प्रदेश के कई शहरों—मेरठ, नोएडा, गाजियाबाद और अन्य स्थानों—से जुड़ते नजर आए। इसी कड़ी में राजेश का नाम सामने आया, जिसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया।
राजेश पिछले तीन वर्षों से ग्रेटर नोएडा वेस्ट के एक निजी अस्पताल में ओटी इंचार्ज के रूप में कार्यरत था। मूल रूप से गाजियाबाद निवासी राजेश का व्यवहार अस्पताल में बेहद सामान्य बताया जाता है। सहकर्मियों और अस्पताल सूत्रों के मुताबिक, वह अपने काम के प्रति जिम्मेदार और मिलनसार था। उसने कभी ऐसा कोई संकेत नहीं दिया, जिससे उसके अवैध गतिविधियों में शामिल होने का अंदेशा हो सके।
सूत्रों का कहना है कि राजेश अस्पताल में एक आम कर्मचारी की तरह ही काम करता था और सभी से अच्छे संबंध बनाए रखता था। यही वजह रही कि वह लंबे समय तक संदेह से बचा रहा। बताया जा रहा है कि उसने अचानक एक माह पहले इस्तीफा दे दिया था और हाल ही में उसका नोटिस पीरियड भी पूरा हुआ था।
वहीं, अस्पताल प्रबंधन ने इस मामले से खुद को पूरी तरह अलग बताया है। प्रबंधन का कहना है कि राजेश उनके यहां तीन साल से कार्यरत था, लेकिन उसने एक महीने पहले इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा ही नहीं है, इसलिए इस पूरे प्रकरण से उनका कोई लेना-देना नहीं है।
पुलिस अब इस रैकेट के अन्य सदस्यों और इसके नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है। आशंका जताई जा रही है कि यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और कई लोगों को इसके जरिए नुकसान पहुंचा हो सकता है। आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
यह घटना स्वास्थ्य क्षेत्र में अवैध गतिविधियों को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है और निगरानी तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता को भी उजागर करती है।

