HighLights
- नेतन्याहू ने खामेनेई पर हमला करने का अवसर बताया
- ट्रंप चाहते थे कि युद्ध से बचा जाए
- अमेरिका और इजरायल ने मिलकर बमबारी की
ईरान पर हमले से 48 घंटे पहले, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप से फोन पर वार्ता की। उन्होंने ट्रंप को बताया कि अब खामेनेई को निशाना बनाने और ट्रंप के खिलाफ पूर्व ईरानी प्रयासों का बदला लेने का सबसे अच्छा मौका है।
बैठक और खुफिया जानकारी
सूत्रों के अनुसार, इंटेलिजेंस रिपोर्ट में बताया गया कि खामेनेई और उनके सहयोगी अपने परिसर में बैठक करेंगे। बैठक का समय शनिवार रात से बदलकर सुबह कर दिया गया। नेतन्याहू ने तर्क दिया कि यह मौका हाथ से जाने नहीं देना चाहिए।
इसमें 2024 की एक साजिश शामिल थी, जब ट्रंप राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार थे। नेतन्याहू ने कहा कि यह ऑपरेशन ईरानी जनता को धार्मिक शासन व्यवस्था के खिलाफ प्रेरित कर सकता है।
ट्रंप की प्राथमिकताएँ
ट्रंप ने पहले युद्ध से बचने की इच्छा जताई थी और कूटनीति का समर्थन किया। 2024 में उनके चुनाव अभियान में “अमेरिका फर्स्ट” नीति के तहत ईरान के साथ शांति पर जोर दिया गया।
लेकिन पिछली वार्ता असफल होने के बाद ट्रंप ने जून में अमेरिका और इजरायल के साथ मिलकर ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला करने पर विचार किया।
कूटनीतिक और सैन्य विकल्प
दिसंबर में मार-ए-लागो दौरे के दौरान नेतन्याहू ने ट्रंप को जून ऑपरेशन से असंतोष जताया। ट्रंप ने संकेत दिया कि वे कूटनीति जारी रखना चाहते हैं लेकिन सैन्य विकल्प तैयार रखेंगे।
इस साल ईरान में विरोधी आंदोलन के दौरान, इजरायली और अमेरिकी सेनाओं के बीच गोपनीय समन्वय हुआ। फरवरी में नेतन्याहू ने ट्रंप को ईरान के मिसाइल कार्यक्रम और हमले की संभावनाओं से अवगत कराया।
निष्कर्ष
नेतन्याहू की फोन वार्ता और खुफिया जानकारी ने ट्रंप के निर्णय को प्रभावित किया। ईरान के सर्वोच्च नेता को मारने का अवसर, ट्रंप के लिए कूटनीतिक विकल्पों के बावजूद निर्णायक रहा।

