रायपुर/नई दिल्ली:
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर बस्तर क्षेत्र के समग्र विकास के लिए एक विस्तृत ‘मास्टर ब्लूप्रिंट’ प्रस्तुत किया। इस दौरान उन्होंने नक्सलवाद के खत्म होने के बाद बस्तर में आई शांति और विकास की नई संभावनाओं को रेखांकित किया। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को मानसून के बाद बस्तर दौरे का निमंत्रण भी दिया, जहां कई बड़ी परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण प्रस्तावित है।
मुख्यमंत्री साय ने बताया कि राज्य सरकार बस्तर को विकास के नए मॉडल के रूप में स्थापित करने के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि एक समय नक्सल प्रभावित रहा यह क्षेत्र अब तेजी से शांति और प्रगति की दिशा में आगे बढ़ रहा है। केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से बस्तर में बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में बड़े बदलाव की नींव रखी जा रही है।
प्रस्तुत ब्लूप्रिंट ‘सैचुरेशन, कनेक्ट, फैसिलिटेट, एम्पावर और एंगेज’ रणनीति पर आधारित है। इसके तहत दूरस्थ गांवों को सड़क और पुलों के माध्यम से जोड़ने की योजना है। वर्ष 2027 तक प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अधूरे कार्यों को पूरा करने के साथ ही 228 नई सड़कों और 267 पुलों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही 61 नई परियोजनाओं के लिए केंद्र से विशेष सहायता की मांग भी की गई है।
शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी बड़े सुधार प्रस्तावित हैं। 45 पोटा केबिन स्कूलों को स्थायी भवनों में परिवर्तित किया जाएगा, जबकि युवाओं के लिए 15 स्टेडियम और 2 मल्टीपर्पज हॉल बनाए जाएंगे। स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का विस्तार और डॉक्टरों के लिए ट्रांजिट हॉस्टल बनाने की योजना है। इसके अलावा सुपर स्पेशलिटी अस्पताल और मेडिकल कॉलेज जैसी परियोजनाएं भी प्रस्तावित हैं।
कनेक्टिविटी सुधारने के लिए इंद्रावती नदी पर बैराज, रेल लाइन विस्तार और जगदलपुर एयरपोर्ट के उन्नयन जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। रावघाट-जगदलपुर रेल लाइन परियोजना को भी प्राथमिकता दी गई है, जिससे क्षेत्र की आवाजाही और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
कृषि क्षेत्र में इंद्रावती नदी पर देउरगांव और मटनार में दो प्रमुख सिंचाई परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिससे करीब 31,840 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी। इससे किसानों की आय बढ़ाने और कृषि उत्पादकता में सुधार की उम्मीद है।
सरकार ने आजीविका बढ़ाने के लिए तीन वर्षीय योजना तैयार की है, जिसके तहत वर्ष 2029 तक 85 प्रतिशत परिवारों की मासिक आय 15,000 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये करने का लक्ष्य है। ‘नियद नेल्ला नार 2.0’ योजना का विस्तार कर अधिक जिलों को इसमें शामिल किया जा रहा है।
पर्यटन के क्षेत्र में बस्तर को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात, कांगेर घाटी नेशनल पार्क और एडवेंचर टूरिज्म से जुड़ी परियोजनाओं पर तेजी से काम हो रहा है। साथ ही ‘बस्तर ओलंपिक’ और ‘बस्तर पंडुम’ जैसे आयोजन क्षेत्रीय पहचान को मजबूत कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘बस्तर मुन्ने’ कार्यक्रम के तहत हर ग्राम पंचायत में शिविर आयोजित कर लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे पहुंचाया जाएगा। इससे प्रशासनिक प्रक्रिया सरल होगी और लोगों की समस्याओं का मौके पर समाधान हो सकेगा।
प्रधानमंत्री के संभावित दौरे के दौरान जिन प्रमुख परियोजनाओं का शिलान्यास प्रस्तावित है, उनमें जगदलपुर एयरपोर्ट विस्तार, दंतेवाड़ा मेडिकल कॉलेज और एजुकेशन सिटी जैसी योजनाएं शामिल हैं। यह पहल बस्तर को शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी विकास के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।


