राजस्थान की न्याय व्यवस्था इस समय गंभीर दबाव से गुजर रही है। राज्य के जिला और अधीनस्थ न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या बढ़कर 25.56 लाख से अधिक हो चुकी है। यह आंकड़ा केवल न्यायिक प्रक्रिया की सुस्ती को नहीं दर्शाता, बल्कि आम जनता को समय पर न्याय न मिल पाने की पीड़ा को भी उजागर करता है। केंद्र सरकार ने यह जानकारी राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में साझा की है।
अपराधों से भरी अदालतें
जनवरी 2026 तक के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कुल लंबित मामलों में 20.47 लाख आपराधिक और 5.08 लाख नागरिक मामले शामिल हैं। यानी लगभग 80 प्रतिशत मामले आपराधिक प्रकृति के हैं। यह स्थिति पुलिस जांच, चार्जशीट दाखिल करने और सुनवाई की धीमी प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े करती है।
जयपुर बना सबसे बड़ा केंद्र
राजधानी जयपुर राज्य में लंबित मामलों का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है। जयपुर मेट्रो कोर्ट-I में 3.58 लाख और मेट्रो कोर्ट-II में 3.09 लाख मामले लंबित हैं। दोनों मेट्रो न्यायालयों में कुल 6.67 लाख से अधिक मामले लंबित हैं, जो राज्य के कुल लंबित मामलों का एक चौथाई से भी अधिक है।
अन्य जिलों की स्थिति
जयपुर के बाद अलवर में 1.32 लाख, जोधपुर मेट्रो में 1.15 लाख, उदयपुर में 1.14 लाख और कोटा में 1.02 लाख मामले लंबित हैं। भिलवाड़ा में भी 80 हजार से अधिक मामले अदालतों में फैसले का इंतजार कर रहे हैं। लगभग सभी जिलों में आपराधिक मामले कुल लंबित मामलों का तीन-चौथाई हिस्सा बने हुए हैं।
छोटे जिले भी अछूते नहीं
हालांकि सालूम्बर, फलोदी, बालोतरा और जैसलमेर जैसे जिलों में मामलों की संख्या तुलनात्मक रूप से कम है, लेकिन वहां भी आपराधिक मामलों का अनुपात नागरिक मामलों से कहीं अधिक है। यह दर्शाता है कि समस्या केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है।
न्यायिक पदों की कमी
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिला और अधीनस्थ न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति राज्य सरकार और संबंधित उच्च न्यायालय की जिम्मेदारी है। सुप्रीम कोर्ट ने 2007 में आदेश दिया था कि न्यायिक पदों को भरने के लिए तय समय-सीमा का पालन किया जाए, लेकिन व्यवहार में यह प्रक्रिया अक्सर लंबी खिंच जाती है।
डिजिटल न्याय की पहल
राजस्थान में ई-कोर्ट्स परियोजना पूरी तरह लागू की जा चुकी है। राज्य के 1,171 न्यायालय कंप्यूटरीकृत हो चुके हैं। 5.17 लाख से अधिक मामलों की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए की गई है और 1.21 लाख से अधिक मामले ई-फाइल किए गए हैं।
वर्चुअल कोर्ट और ग्राम न्यायालय
राजस्थान की वर्चुअल ट्रैफिक कोर्ट ने 2.70 लाख ट्रैफिक चालान मामलों का निपटारा कर 2.02 करोड़ रुपये का ऑनलाइन जुर्माना वसूला है। वहीं, ग्रामीण इलाकों में न्याय की पहुंच बढ़ाने के लिए 33 जिलों में 45 ग्राम न्यायालय संचालित किए जा रहे हैं।
निष्कर्ष
राजस्थान की अदालतों में लंबित मामलों की भारी संख्या न्याय व्यवस्था के सामने एक बड़ी चुनौती है। डिजिटल पहल और ग्राम न्यायालय राहत जरूर देते हैं, लेकिन जब तक न्यायाधीशों की संख्या नहीं बढ़ेगी और प्रक्रियाओं में तेजी नहीं आएगी, तब तक आम आदमी को समय पर न्याय मिलना मुश्किल बना रहेगा।


