मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव अब खतरनाक स्तर पर पहुंचता दिख रहा है। ईरान ने कुवैत की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरियों में से एक मीना अल-अहमदी पर ड्रोन हमला कर दिया, जिससे वहां कई यूनिट्स में भीषण आग लग गई। यह हमला ऐसे समय हुआ है जब क्षेत्र में पहले से ही अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है।
कुवैत की राष्ट्रीय तेल कंपनी Kuwait Petroleum Corporation (KPC) के मुताबिक, शुक्रवार सुबह हुए इस हमले में रिफाइनरी की कई ऑपरेशनल इकाइयां प्रभावित हुई हैं। आग इतनी तेज थी कि उसे काबू में करने के लिए फायर ब्रिगेड और आपातकालीन टीमों को तुरंत मौके पर तैनात करना पड़ा। अधिकारियों का कहना है कि आग पर नियंत्रण पाने के लिए सभी सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किए गए हैं, लेकिन नुकसान का पूरा आकलन अभी बाकी है।
ट्रंप की धमकी के बाद बढ़ा तनाव
हाल के दिनों में डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान को दी गई कड़ी चेतावनियों के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। अमेरिका द्वारा ईरान के रणनीतिक ठिकानों पर कार्रवाई के बाद तेहरान ने जवाबी कदम तेज कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कुवैत की इस रिफाइनरी पर हमला उसी प्रतिक्रिया का हिस्सा हो सकता है।
तेल आपूर्ति पर पड़ सकता है वैश्विक असर
मीना अल-अहमदी रिफाइनरी कुवैत की सबसे महत्वपूर्ण तेल प्रोसेसिंग इकाइयों में गिनी जाती है। यहां बड़े पैमाने पर कच्चे तेल को रिफाइन कर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भेजा जाता है। ऐसे में इस हमले से न केवल कुवैत की उत्पादन क्षमता प्रभावित हो सकती है, बल्कि वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला पर भी इसका असर पड़ने की आशंका है। इससे आने वाले दिनों में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
सऊदी अरब ने गिराए ईरानी ड्रोन
इस बीच सऊदी अरब ने दावा किया है कि उसने ईरान के पांच ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर दिया। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, पहले चार ड्रोन को इंटरसेप्ट किया गया था, जबकि बाद में एक और ड्रोन को मार गिराया गया।
इजरायल में अलर्ट, सायरन गूंजे
वहीं इजरायल के प्रमुख शहर तेल अवीव में भी खतरे के सायरन बजने लगे हैं। इजरायली सेना ने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है और कहा है कि उसका एयर डिफेंस सिस्टम ईरान से दागी गई मिसाइलों को रोकने के लिए पूरी तरह सक्रिय है।
क्षेत्रीय संघर्ष का विस्तार
ईरान ने दावा किया है कि उसके हालिया हमले संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और इजरायल में स्थित ठिकानों को निशाना बनाकर किए गए हैं। यह घटनाक्रम इस बात का संकेत है कि मिडिल ईस्ट में संघर्ष अब एक व्यापक क्षेत्रीय टकराव में बदल सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि हालात जल्द नहीं संभले, तो इसका असर केवल मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजारों पर भी गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

