नई दिल्ली:
भारतीय टेलीविजन इतिहास में कुछ दृश्य ऐसे हैं, जो समय के साथ फीके नहीं पड़ते। 1987-88 में प्रसारित रामानंद सागर की ‘रामायण’ का कुंभकर्ण वध दृश्य भी उन्हीं में से एक है। यह सीन न सिर्फ उस दौर में दर्शकों को भावुक कर गया था, बल्कि कोरोना काल में इसके पुनः प्रसारण के दौरान भी लाखों लोगों की आंखें नम हो गई थीं।
रामायण में कुंभकर्ण का किरदार अभिनेता नलिन दवे ने निभाया था। अपने प्रभावशाली अभिनय और दमदार स्क्रीन प्रेजेंस के कारण उन्होंने इस किरदार को जीवंत बना दिया था। बताया जाता है कि जब कुंभकर्ण के वध का एपिसोड प्रसारित हुआ, तो देशभर में दर्शक इस दृश्य को देखकर भावुक हो उठे थे। कुंभकर्ण, जो रावण का भाई होते हुए भी अपने सिद्धांतों और सादगी के लिए जाना जाता है, उसकी मृत्यु ने लोगों के दिल को छू लिया था।
खास बात यह भी है कि नलिन दवे का निधन वर्ष 1990 में महज 50 वर्ष की उम्र में हो गया था। यही वजह है कि जब 2020 में लॉकडाउन के दौरान रामायण का दोबारा प्रसारण हुआ, तो दर्शकों ने न सिर्फ किरदार बल्कि अभिनेता को भी याद करते हुए श्रद्धांजलि दी।
इस यादगार सीन की शूटिंग भी अपने आप में दिलचस्प रही। लक्ष्मण की भूमिका निभाने वाले अभिनेता सुनील लहरी ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उस समय तकनीक सीमित होने के बावजूद कुंभकर्ण वध का दृश्य बेहद प्रभावशाली ढंग से फिल्माया गया। सिर कटने वाले दृश्य को क्रोमा तकनीक और पानी के टैंक की मदद से तैयार किया गया था। उस दौर में कंप्यूटर ग्राफिक्स इतने उन्नत नहीं थे, फिर भी मेकर्स ने रचनात्मकता और तकनीकी समझ के जरिए इस सीन को वास्तविकता के करीब बना दिया।
रामानंद सागर द्वारा निर्मित और निर्देशित ‘रामायण’ भारतीय टेलीविजन का एक मील का पत्थर साबित हुई। यह धारावाहिक संस्कृत के प्राचीन महाकाव्य रामायण पर आधारित था और इसे दूरदर्शन पर प्रसारित किया गया था। उस समय यह शो इतना लोकप्रिय हुआ कि इसके प्रसारण के दौरान सड़कों पर सन्नाटा छा जाता था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उस समय इस सीरियल को करीब 82 प्रतिशत दर्शकों ने देखा, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है।
आज भी ‘रामायण’ और उसके किरदार दर्शकों के दिलों में बसे हुए हैं। कुंभकर्ण का वध सीन इस बात का उदाहरण है कि किस तरह एक मजबूत कहानी और सशक्त अभिनय किसी दृश्य को कालजयी बना सकते हैं।

