कोलंबो/नई दिल्ली, 12 अप्रैल 2026
भारत की प्रमुख रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) ने वैश्विक स्तर पर अपनी उपस्थिति मजबूत करते हुए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। कंपनी ने श्रीलंका के सबसे बड़े शिपयार्ड ‘कोलंबो डॉकयार्ड पीएलसी’ (CDPLC) में 51 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीद ली है। करीब 250 करोड़ रुपये के इस अधिग्रहण के साथ ही CDPLC अब आधिकारिक तौर पर MDL की सहायक कंपनी बन गई है।
यह पहली बार है जब MDL ने किसी विदेशी कंपनी का अधिग्रहण किया है, जिसे भारत सरकार के ‘मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047’ की दिशा में एक अहम उपलब्धि माना जा रहा है। रक्षा मंत्रालय के अधीन आने वाली इस नवरत्न कंपनी का यह कदम भारत की समुद्री शक्ति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान देने वाला माना जा रहा है।
250 करोड़ में पूरी हुई डील, बोर्ड का पुनर्गठन
मझगांव डॉक ने इस सौदे के तहत 2.68 करोड़ अमेरिकी डॉलर (लगभग 250 करोड़ रुपये) का निवेश किया है। अधिग्रहण के साथ ही CDPLC के बोर्ड का पुनर्गठन भी किया गया है। MDL के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक कैप्टन जगमोहन (सेवानिवृत्त) को 7 अप्रैल 2026 से CDPLC का गैर-कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
इसके अलावा, MDL के वरिष्ठ अधिकारियों—बीजू जॉर्ज (निदेशक-शिपबिल्डिंग), रुचिर अग्रवाल (निदेशक-वित्त) और विश गोविंदासामी को भी बोर्ड में शामिल किया गया है। वहीं, थिमिरा एस. गोडाकुंबुरा कंपनी के प्रबंध निदेशक और सीईओ के पद पर बने रहेंगे।
CDPLC को मिला 150 मिलियन डॉलर का बड़ा कॉन्ट्रैक्ट
अधिग्रहण के तुरंत बाद CDPLC को अपने इतिहास का सबसे बड़ा शिपबिल्डिंग ऑर्डर भी मिला है। नवंबर 2025 में फ्रांस की कंपनी ‘ऑरेंज मरीन’ के साथ लगभग 150 मिलियन डॉलर का समझौता हुआ, जिसके तहत दो अत्याधुनिक केबल बिछाने और मरम्मत करने वाले जहाज बनाए जाएंगे।
करीब 100 मीटर लंबे इन जहाजों में हाइब्रिड-इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन तकनीक और ABB एज़िपॉड यूनिट्स का उपयोग किया जाएगा। इनकी डिलीवरी वर्ष 2028 और 2029 में प्रस्तावित है। पहले जहाज का निर्माण कार्य 1 अप्रैल 2026 से शुरू भी हो चुका है।
भारत-श्रीलंका समुद्री सहयोग को मिलेगा बढ़ावा
इस रणनीतिक साझेदारी का असर भारत-श्रीलंका के समुद्री संबंधों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। 7 अप्रैल 2026 को CDPLC और ड्रेजिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (DCI) के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इसके अलावा, शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SCI) के जहाजों की मरम्मत का कार्य भी CDPLC को सौंपे जाने पर विचार चल रहा है।
20% मुनाफा बढ़ाने का लक्ष्य
कैप्टन जगमोहन ने इस अवसर पर कहा कि यह अधिग्रहण न केवल दोनों कंपनियों के लिए, बल्कि भारत और श्रीलंका के बीच सहयोग के लिए भी ऐतिहासिक है। उन्होंने उम्मीद जताई कि नए ऑर्डर और भारत से मिलने वाले शिप रिपेयर कार्य के जरिए चालू वित्त वर्ष में CDPLC के राजस्व और मुनाफे में 20 प्रतिशत तक वृद्धि हासिल की जा सकती है।
252 साल पुरानी कंपनी का नया अध्याय
1774 में स्थापित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड देश का एकमात्र ऐसा शिपयार्ड है जिसने नौसेना के लिए विध्वंसक और पारंपरिक पनडुब्बियों का निर्माण किया है। 1960 से अब तक कंपनी 800 से अधिक जहाज बना चुकी है। वर्तमान में इसका बाजार पूंजीकरण करीब 1 लाख करोड़ रुपये के आसपास है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह अधिग्रहण भारत को वैश्विक शिपबिल्डिंग बाजार में मजबूत प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हो सकता है।

