23.4 C
Madhya Pradesh
Sunday, November 30, 2025

एकता, सेवा और संस्कार का दीप — जयपुर में अग्रवाल समाज महासभा का प्रेरक दीपावली मिलन समारोह

IMG-20230522-WA0021
previous arrow
next arrow
CG City News

दीप जलाने का अर्थ केवल अंधकार मिटाना नहीं होता, बल्कि यह अपने भीतर की उजास को पहचानने का अवसर होता है।
जयपुर में अग्रवाल समाज महासभा राजस्थान द्वारा आयोजित दीपावली मिलन समारोह ने यही संदेश पूरे समाज को दिया —
कि जब एकता, सेवा और संस्कार के दीप एक साथ जलते हैं, तो हर दिशा आलोकित हो उठती है।

रोशनी से भरा आरंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश की वंदना से हुआ।
जैसे ही दीप प्रज्वलित हुआ, पूरा प्रांगण उजाले से भर गया — यह उजाला केवल दीपों का नहीं, बल्कि समाज के मनोबल और उत्साह का प्रतीक था।
वहाँ उपस्थित हर व्यक्ति के भीतर यह भावना थी कि “मैं समाज का हिस्सा हूँ, और समाज मुझसे है।”

दीपों की उस लौ में मानो यह संदेश था —

“एक छोटा-सा दीप भी अंधकार को मिटा सकता है, बस उसे जलाने का साहस चाहिए।”

प्रेरक उपस्थिति

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष अमित गोयल, सीताराम जी अग्रवाल, पंकज गोयल, और राजेंद्र महार उपस्थित रहे।
उनका स्वागत पुष्पमालाओं और शॉल ओढ़ाकर किया गया।
अमित गोयल ने अपने संबोधन में कहा —
“समाज तभी सशक्त बनता है जब उसके सदस्य एक-दूसरे की प्रगति में सहभागी बनते हैं। दीपावली मिलन जैसे आयोजन हमें यह सिखाते हैं कि प्रतिस्पर्धा नहीं, सहयोग ही सच्ची शक्ति है।”

उनके ये शब्द केवल भाषण नहीं थे, बल्कि एक प्रेरक विचार बनकर सबके हृदय में बस गए।

अग्रवाल समाज समिति विश्वकर्मा का योगदान

समारोह में अग्रवाल समाज समिति विश्वकर्मा के पदाधिकारी — अध्यक्ष सोमप्रकाश गर्ग, महामंत्री राम किशोर अग्रवाल, संदीप गोयल, संरक्षक अशोक जी (टस्कोला वाले), पवन कुमार गोयल, केदारनाथ अग्रवाल और मुक्तिलाल अग्रवाल — प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
उन्होंने समाज में सेवा कार्यों को और मजबूत करने का आह्वान किया।

सोमप्रकाश गर्ग ने कहा —
“हम सब अलग-अलग दीप हैं, लेकिन जब एक साथ जलते हैं, तो पूरा समाज रोशन होता है।”
यह वाक्य वहाँ उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति के लिए प्रेरणा बन गया।

नेतृत्व और दृष्टिकोण

प्रदेश अध्यक्ष विनोद गोयल ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा —
“अग्रवाल समाज की पहचान केवल व्यापार में नहीं, बल्कि सेवा और एकता में है। हमें अपनी अगली पीढ़ी को यह सिखाना है कि सफलता तब तक अधूरी है, जब तक उसमें समाज का हित शामिल न हो।”

महामंत्री माखनलाल कांडा ने युवाओं से कहा कि वे शिक्षा, संस्कार और सेवा के तीन दीप अपने भीतर जलाएँ।
उन्होंने कहा — “युवाओं के उत्साह में समाज का भविष्य छिपा है। यदि नई पीढ़ी आगे बढ़ेगी, तो समाज का नाम स्वर्णाक्षरों में अंकित होगा।”

इन शब्दों से समारोह का वातावरण ऊर्जा से भर उठा। हर युवा के मन में कुछ करने की प्रेरणा जागी।

जन्मोत्सव बना प्रेरणा का क्षण

कार्यक्रम का विशेष क्षण तब आया जब मीडिया प्रभारी प्रदीप जी अग्रवाल का जन्मदिन पूरे समारोह के बीच मनाया गया।
उनके सम्मान में सबने तालियाँ बजाईं और केक काटकर शुभकामनाएँ दीं।

प्रदीप जी ने कहा —
“यह जन्मदिन मेरे लिए नहीं, बल्कि समाज के समर्पित परिवार के लिए है। यदि हम सभी मिलकर काम करें, तो कोई भी सपना असंभव नहीं।”

उनके ये शब्द सुनकर हर किसी की आँखों में चमक और दिल में उत्साह उमड़ पड़ा।

संस्कृति और सेवा का संगम

दीपावली मिलन का यह उत्सव केवल औपचारिक सभा नहीं था —
यह संस्कृति और प्रेरणा का जीवंत संगम था।
बच्चों और युवाओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं — गीत, नृत्य और कविताओं के माध्यम से उन्होंने समाज की परंपराओं को नई ऊर्जा दी।
महिलाओं ने भी अपनी सक्रिय भागीदारी से यह साबित किया कि समाज की शक्ति तभी संपूर्ण है जब हर वर्ग उसमें जुड़ा हो।

सम्मान और कृतज्ञता

कार्यक्रम में समाज के उन सदस्यों को सम्मानित किया गया जिन्होंने सेवा, शिक्षा, या समाज सुधार के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया था।
सम्मान पाने वालों की आँखों में गर्व के आँसू थे, और दर्शकों की आँखों में प्रेरणा की चमक।
यह सम्मान केवल व्यक्तियों का नहीं था — यह उस भावना का था जो कहती है,

“सेवा करने वाला ही सच्चा दीप है, जो दूसरों का मार्ग रोशन करता है।”

एकता का स्वाद

कार्यक्रम के अंत में सामूहिक भोज का आयोजन हुआ।
सबने एक साथ बैठकर भोजन किया — बिना भेदभाव, बिना औपचारिकता।
भोजन की थालियाँ प्रेम, स्नेह और एकता से भरी थीं।
यह दृश्य जैसे यह सिखा रहा था —

“जब साथ बैठने का संस्कार जीवित हो, तो समाज कभी कमजोर नहीं हो सकता।”

प्रेरणा का संदेश

दीपावली मिलन का यह आयोजन केवल उत्सव नहीं था — यह एक सामाजिक संकल्प था।
यहाँ हर व्यक्ति ने महसूस किया कि समाज की सच्ची शक्ति धन या पद में नहीं, बल्कि मिल-जुलकर आगे बढ़ने की भावना में है।

दीपों की पंक्तियों में जैसे यह संदेश छिपा था —
“जहाँ एकता है, वहाँ प्रकाश है। जहाँ सेवा है, वहाँ समृद्धि है। और जहाँ संस्कार हैं, वहाँ समाज अमर है।”

समापन — उजाले की ओर यात्रा

रात ढल रही थी, लेकिन मंच पर सजे दीप अभी भी जल रहे थे — जैसे समाज के हर सदस्य के भीतर उम्मीद की ज्योति जगमगा रही हो।
लोग एक-दूसरे से विदा लेते हुए मुस्कुरा रहे थे।
हर हृदय में एक ही भावना थी — “हम साथ हैं, और साथ रहकर ही आगे बढ़ेंगे।”

जयपुर का यह दीपावली मिलन समारोह आने वाले वर्षों के लिए प्रेरणा का दीप बन गया।
यह आयोजन साबित करता है कि जब समाज अपने भीतर एकता, सेवा और संस्कार के दीप जलाता है, तो न केवल उसका भविष्य, बल्कि पूरा राष्ट्र उजाले से भर जाता है।


CG City News

Related Articles

Stay Connected

0FansLike
3,912FollowersFollow
0SubscribersSubscribe

Latest Articles

error: Content is protected !!