“हम तो यहीं के हैं साहब…” – रहठा में उजड़ा एक घर, टूटी उम्मीदें

IMG-20230522-WA0021
previous arrow
next arrow
CG City News

“साहब, हम तो यहीं के हैं… बचपन से यही रह रहे हैं,”
नरेश काछी की आवाज़ काँप रही थी। सामने खड़े अधिकारी ने कड़क स्वर में जवाब दिया – “यह सरकारी ज़मीन है, हटाना पड़ेगा।”

“पर हमने तो लोन लेकर यह मकान बनाया है,” नरेश बोला।
“हमें तो कल ही नोटिस मिला, इतनी जल्दी क्यों?”
अधिकारी ने कंधे उचकाते हुए कहा – “आदेश ऊपर से है, हम कुछ नहीं कर सकते।”

इतना कहते ही बुलडोजर आगे बढ़ा और कुछ ही मिनटों में ईंटें बिखर गईं।
नरेश की पत्नी चिल्लाती रही, “साहब, बस दो दिन और दे दीजिए…”
लेकिन शोर मशीनों से दब गया।

पास खड़े गाँव के बुज़ुर्ग बोले, “यह परिवार तो साठ साल से यहाँ रह रहा है, इन्हें पहले मौका तो देना चाहिए था।”
किसी ने वीडियो बनाया, किसी ने सिर झुका लिया।

बाद में जब प्रशासन चला गया, तो नरेश के घर की जगह मलबा रह गया।
बच्चे बिखरे हुए खिलौनों को समेट रहे थे।
माँ दीवारों के बीच पड़े भगवान की मूर्ति को उठाकर बोली, “चलो बेटा, अब इन्हें कहीं और रख देंगे।”

कहानी छोटी है, पर दर्द लंबा।
एक परिवार का आशियाना उजड़ गया, और रहठा की हवा में बस एक वाक्य गूंजता रह गया —
“हम तो यहीं के हैं साहब…”


CG City News

Related Articles

[td_block_social_counter facebook="tagdiv" twitter="tagdivofficial" youtube="tagdiv" style="style8 td-social-boxed td-social-font-icons" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLWJvdHRvbSI6IjM4IiwiZGlzcGxheSI6IiJ9LCJwb3J0cmFpdCI6eyJtYXJnaW4tYm90dG9tIjoiMzAiLCJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBvcnRyYWl0X21heF93aWR0aCI6MTAxOCwicG9ydHJhaXRfbWluX3dpZHRoIjo3Njh9" custom_title="Stay Connected" block_template_id="td_block_template_8" f_header_font_family="712" f_header_font_transform="uppercase" f_header_font_weight="500" f_header_font_size="17" border_color="#dd3333"]

Latest Articles