ट्रंप के साथ 35 देश: बोर्ड ऑफ पीस का क्या है प्लान?

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डोनाल्ड ट्रंप ने दावोस में अपनी ‘शांति परिषद’ के गठन की घोषणा की, जिसमें 35 देश शामिल हुए। इसका उद्देश्य गाजा के अलावा अंतरराष्ट्रीय मामलों को देखना है। ट्रंप ने इसे संयुक्त राष्ट्र का विकल्प मानने से इनकार किया, लेकिन इसकी प्रभावशीलता पर सवाल उठाए। हालांकि, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस जैसे प्रमुख देशों ने इसमें शामिल होने से दूरी बनाई है, जिससे संयुक्त राष्ट्र के प्रभाव पर संभावित असर की आशंका है। भारत को भी निमंत्रण मिला है।

  1. ट्रंप ने दावोस में ‘शांति परिषद’ के गठन की घोषणा की।
  2. 35 देश शामिल हुए, प्रमुख शक्तियां अभी दूर हैं।
  3. परिषद गाजा समेत अंतरराष्ट्रीय मामलों पर ध्यान केंद्रित करेगी।

स्विट्जरलैंड के दावोस शहर में विश्व आर्थिक मंच के कार्यक्रम से इतर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को अपनी बहुचर्चित-महात्वाकांक्षी शांति परिषद (बोर्ड आफ पीस) के गठन की घोषणा कर दी।

इस परिषद से अभी अन्य प्रमुख देशों ने दूरी बनाई हुई है लेकिन करीब तीन दर्जन देश ट्रंप की इस पहल में उनके साथ आए हैं। रूस ने इसमें शामिल होने पर विचार करने की बात कही है। भारत को भी इस परिषद में शामिल होने का आमंत्रण मिला है लेकिन सरकार ने इस पर अभी कोई निर्णय नहीं लिया है।

ट्रंप ने कहा है कि शांति परिषद गाजा में सामान्य स्थिति की बहाली से इतर अंतरराष्ट्रीय मामलों को भी देखेगी। उन्होंने इसे अभी तक की सबसे ज्यादा प्रभावशाली विश्व संस्था बताया है। कहा, शांति परिषद संयुक्त राष्ट्र को साथ लेकर कार्य करेगी। अपने पिछले बयान के उलट ट्रंप ने इसे संयुक्त राष्ट्र का विकल्प बनाने से इन्कार किया है। लेकिन यह भी कहा है कि संयुक्त राष्ट्र को लेकर जितनी संभावनाएं थीं उतने प्रभावी रूप में वह कार्य नहीं कर पाया।

कम होगा UN का प्रभाव?

वैसे कूटनीतिक मामलों के जानकार ट्रंप की इस पहल को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रभाव को कम करने वाला मान रहे हैं। शायद इसी आशंका के चलते सुरक्षा परिषद के बाकी चार स्थायी सदस्य देशों-रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस में से किसी ने अभी तक शांति परिषद में शामिल होने का निर्णय नहीं लिया है।

इस शांति परिषद में देशों को तीन वर्ष के लिए अस्थायी सदस्यता मिलेगी। लेकिन एक अरब डालर का अंशदान देने वालों को स्थायी सदस्यता मिलेगी। अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि तीन वर्ष तक एक-एक अरब डालर की धनराशि देनी होगी या कुल एक अरब डालर देने मात्र से स्थायी सदस्यता मिलेगी।

एकत्रित धनराशि गाजा के विकास पर खर्च होगी। ट्रंप ने इस परिषद में शामिल होने के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समेत 50 देशों के नेताओं को आमंत्रित किया है लेकिन अभी तक 35 देशों ने ही इसमें शामिल होने की घोषणा की है। लेकिन शांति परिषद के गठन के समारोह में सदस्यता ग्रहण करने की घोषणा करने वाले ज्यादातर देशों के प्रतिनिधि उपस्थित नहीं थे।

शांति परिषद के गठन के बारे में ट्रंप ने सितंबर 2025 में गाजा के लिए शांति योजना की घोषणा के समय बताया था। उस समय यह परिषद केवल गाजा के मामलों को देखने के लिए बताई गई थी लेकिन अब इसे विश्व स्तरीय बनाकर युद्धों और टकरावों को रोकने के लिए गठित किया गया है। इस परिषद के प्रमुख अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप हैं जबकि कार्यकारी समिति में अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो, ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर, विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा समेत कई लोग हैं।

पुतिन ने कहा- एक अरब डॉलर अवमुक्त हों तो विचार करेगा रूस

शांति परिषद में शामिल होने के सवाल पर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि ट्रंप के आमंत्रण पर वह तभी विचार करेंगे जब अमेरिका में जब्त रूसी संपत्ति में से एक अरब डालर की धनराशि अवमुक्त कर उसे स्थायी सदस्यता वाले कोष में जमा किया जाए।

जबकि चीन ने अंतरराष्ट्रीय मामलों पर निर्णय के लिए संयुक्त राष्ट्र से इतर किसी संस्था में शामिल होने या उसे मान्यता देने से साफ इन्कार कर दिया है। कहा कि वह संयुक्त राष्ट्र के ढांचे में बनी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के पालन के लिए प्रतिबद्ध है। फ्रांस ने शांति परिषद में शामिल होने से स्पष्ट इन्कार कर दिया है जबकि ब्रिटेन ने कहा है कि वह अभी इस संस्था में शामिल नहीं होगा।


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