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Thursday, April 16, 2026

वाह रे…..पहले लाखों- फूंक शौचालय बनवाया अब खंडहर बना रहे, कोरबा जिले के इस पंचायत पर डालिए नजर,

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CG City News

कोरबा // पसान  :: इसे सरकार के पैसों की बर्बादी नहीं तो क्या कहेंगे। क्योंकि जिस तरह से ग्राम पंचायतों में लाखों रुपए खर्चकर सार्वजनिक शौचालय बनवाने के बाद उसे खंडहर होने के लिए जिम्मेदारों ने छोड़ दिया है, इससे यह केवल सरकारी के पैसों को फूंकने जैसा ही नजर आ रहा है। जिम्मेदारों ने इसे बनवाने के लिए ताला लगवाकर छोड़ दिया है जिसका ताला सालों से शायद ही एक बार भी खुला हो।

 

*कोरबा जिले के इस पंचायत पर नजर डालिए*
जिले के जनपद पंचायत पोड़ी उपरोड़ा अंतर्गत ग्राम पंचायत पसान में लगभग दस वर्ष पूर्व शुलभ शौचालय का निर्माण कराया ,लोगों को लगा की अब यहां बस स्टैंड के समीप अब शौचालय की समस्या नहीं रहेगी उन्हें बस उसके उद्घाटन का इंतजार था , लेकिन समय बीतता गया पर उद्धघाटन और उपयोग की दृष्टि से बिना उपयोग के सरकारी राशि दुरुपयोग हो गया आज टाइल्स से सुसज्जित शौचालय खंडहर में तब्दील हो गया है , लाखो की राशि भ्रष्टाचार की भेट चढ़ गई, यहां आज भी ताला लटका हुआ है जिससे लोगों विशेषकर राहगीरों को परेशानी का लगातार सामना करना पड़ रहा है ,
*पंचायतों में स्वच्छता लाने का ढिंढोरा*
जिनके भरोसे जिला प्रशासन के द्वारा ग्राम पंचायतों में स्वच्छता लाने का ढिंढोरा पीटा गया था उन्हें ही जिम्मेदारों ने शो पीस बनाकर रख दिया है। गौरतलब स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांवों में सार्वजनिक स्थानों पर लोगों को प्रसाधन की व्यवस्था सुलभ रुप से उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सामुदायिक शौचालयों का निर्माण कराना गया है। योजना के तहत पंचायतों में सामुदायिक स्वास्थ्य शौचालय बनवाया गया है जहां अधिकतर जगहों पर ताला ही लटक रहा है।
*एक शौचालय बनाने में तीन से पांच लाख तक खर्च,*
सामुदायिक शौचालय के लिए राशि निर्माण पंचायत की आबादी के अनुसार जारी की गई है। जिसमें तीन लाख रुपए से लेकर पांच लाख रुपए तक एक सामुदायिक शौचालय के लिए राशि दी गई थी। इसमें स्वच्छ भारत मिशन, मनरेगा और 15वें दिन तीनों की राशि शामिल है। अधिकांश जगहों पर पंचायत ही निर्माण एजेंसी है और निर्माण हो जाने के बाद सरपंच ही संचालन के लिए जवाबदार है। मगर विडंबना है कि जिन्होंने खुद बनवाया है उन्होंने ही मुंंह फेर लिया।
oplus_0न तो सरपंच-सचिवों को कोई मतलब है और न ही जनपद से लेकर जिला पंचायत और जिला प्रशासन में बैठे अफसरों को।               ग्राम पंचायत सचिव से उनका पक्ष जानने के लिए फोन से संपर्क किया गया जिसमें  उनसे संपर्क नही हो सका , हो सकता है शौचालय को चालू करने में कोई टेक्निकल ईसू हो ,ये बात ग्राम पंचायत सचिव ही बता सकते है 

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