पश्चिम एशिया में युद्ध जैसे हालात के कारण संभावित रसोई गैस संकट से निपटने के लिए यूपी सरकार तैयारी कर रही है। वन निगम के 62 डिपो में 12 हजार घन मीटर से अधिक जलावन लकड़ी उपलब्ध है।
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वन निगम के 62 डिपो में उपलब्ध हैं 12 हजार घन मीटर से अधिक जलावन की लकड़
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध जैसे हालातों के बीच वैश्विक आपूर्ति पर पड़ रहे असर को देखते हुए प्रदेश सरकार ने रसोई गैस की संभावित किल्लत से निपटने की तैयारियां तेज कर दी हैं। हालात बिगड़ने की आशंका के मद्देनजर अब वैकल्पिक ईंधन के तौर पर जलावन लकड़ी की व्यवस्था को सक्रिय किया जा रहा है। यदि गैस की आपूर्ति बाधित होती है या कीमतों में अत्यधिक वृद्धि होती है, तो आम जनता को राहत देने के लिए वन निगम के माध्यम से लकड़ी उपलब्ध कराई जाएगी।
उत्तर प्रदेश वन निगम के 62 डिपो में करीब 12 हजार घन मीटर जलावन लकड़ी का स्टाक मौजूद है। निगम के डिपो पूर्वांचल, पश्चिम, तराई, बुंदेलखंड व अवध के सभी प्रमुख क्षेत्रों में हैं। यहां उपलब्ध लकड़ी को आम लोगों को छह से सात रुपये प्रति किलो की दर से उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है, ताकि जरूरतमंदों को सस्ती दर पर ईंधन मिल सके।
जमाखोरी और कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए वन निगम ने वितरण प्रणाली में सख्ती बरतने का निर्णय लिया है। इसके तहत प्रत्येक व्यक्ति को एक माह में अधिकतम 10 क्विंटल लकड़ी ही दी जाएगी। लकड़ी प्राप्त करने के लिए आधार कार्ड की प्रति और मोबाइल नंबर लिया जाएगा। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि पारदर्शिता बनी रहे और वास्तविक लाभार्थियों तक ही सुविधा पहुंचे।
वन निगम के अधिकारियों का कहना है कि यह कदम एहतियातन उठाया गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में आम लोगों को रसोई ईंधन के लिए परेशानी न झेलनी पड़े। साथ ही जरूरत पड़ने पर जलावन की लकड़ी का स्टाक और बढ़ाने की भी तैयारी की जा रही है। वन निगम के पास क्लास-3 व क्लास-4 की ऐसी लकड़ी भी उपलब्ध है जिसे जलावन में बदला जा सकता है। यदि जलावन की लकड़ी कम पड़ी तो ऐसी लकड़ी का भी उपयोग ईंधन के तौर पर किया जाएगा।

