वैश्विक संकटों के बीच मजबूती से उभरा भारत: IIM रायपुर के दीक्षांत समारोह में बोले विदेश मंत्री एस. जयशंकर

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CG City News

रायपुर
वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव और अनिश्चितताओं के बीच भारत की मजबूती और संतुलित नीति को लेकर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। नवा रायपुर स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) के 15वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक संकटों के बावजूद भारत ने अपने हितों की प्रभावी ढंग से रक्षा करते हुए मजबूती से उभरने का काम किया है।

समारोह में विद्यार्थियों, फैकल्टी और गणमान्य अतिथियों की मौजूदगी में जयशंकर ने कहा कि आज की दुनिया तेजी से बदल रही है और इस बदलते परिदृश्य में भारत ने अपनी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों को संतुलित तरीके से संभाला है। उन्होंने विशेष रूप से पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे जटिल हालात में भारत की विदेश नीति ने परिपक्वता और दूरदर्शिता का परिचय दिया है।

विदेश मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में वैश्विक व्यवस्था में बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। देशों के बीच शक्ति संतुलन बदल रहा है और अब निर्णय केवल पारंपरिक मानकों पर नहीं, बल्कि तकनीकी क्षमता, ऊर्जा सुरक्षा और सैन्य ताकत जैसे कारकों के आधार पर लिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस बदलती दुनिया में सफल होने के लिए केवल घरेलू समझ ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण भी जरूरी है।

जयशंकर ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि चाहे वे व्यवसाय में जाएं या किसी अन्य क्षेत्र में, उन्हें वैश्विक परिदृश्य की समझ विकसित करनी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि आज के दौर में जोखिम प्रबंधन और विकल्पों का विस्तार बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। “हमें जोखिम कम करने और विकल्प बढ़ाने की दिशा में लगातार काम करना होगा,” उन्होंने जोर देकर कहा।

अपने भाषण में उन्होंने इस दशक की तीन प्रमुख वैश्विक चुनौतियों का भी उल्लेख किया। इनमें कोविड-19 महामारी, देशों के बीच बढ़ते टकराव और जलवायु परिवर्तन शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों ने पूरी दुनिया को प्रभावित किया है, लेकिन भारत ने इन परिस्थितियों में भी अपने विकास की गति बनाए रखी है।

विदेश मंत्री ने भारत की आर्थिक प्रगति और डिजिटल क्रांति को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में भारत ने उल्लेखनीय विकास किया है और आज यह दुनिया की पांच सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में अपनी जगह बना चुका है। डिजिटल क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि देश ने तकनीकी नवाचार के जरिए आम नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है।

जयशंकर ने आत्मनिर्भरता के महत्व पर भी जोर दिया और कहा कि भारत को वैश्विक बाजार में अपनी अलग पहचान बनानी होगी। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे अपने कौशल और ज्ञान का उपयोग करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय ब्रांड को मजबूत करें।

दीक्षांत समारोह के दौरान संस्थान के छात्रों को डिग्रियां प्रदान की गईं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई। समारोह में जयशंकर के विचारों ने न केवल छात्रों को प्रेरित किया, बल्कि उन्हें वैश्विक चुनौतियों के प्रति जागरूक और तैयार रहने का संदेश भी दिया।

कुल मिलाकर, जयशंकर का यह संबोधन भारत की बदलती वैश्विक भूमिका और उसके आत्मविश्वास को दर्शाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अनिश्चितताओं से भरे इस दौर में भारत न केवल अपने लिए, बल्कि वैश्विक मंच पर भी एक जिम्मेदार और मजबूत साझेदार के रूप में उभर रहा है।


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