पेंड्रारोड रेलवे जंक्शन बना ऐतिहासिक क्षण का साक्षी, गेवरारोड रेल लाइन पर ट्रायल इंजन सफल
गौरेला पेंड्रा मरवाही // पेंड्रारोड रेलवे जंक्शन उस समय एक ऐतिहासिक पल का साक्षी बना, जब शाम लगभग 4:30 बजे विकास की नई दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। फूलों से सुसज्जित डीज़ल इंजन ने जैसे ही पेंड्रारोड से गेवरारोड रेल लाइन के 24वें किलोमीटर, ग्राम भाड़ी तक सफलतापूर्वक ट्रायल रन पूरा किया,

वहां मौजूद लोगों में उत्साह की लहर दौड़ गई।
इस मौके पर रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी, कर्मचारी, स्थानीय नागरिक और मीडिया प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। यह ट्रायल केवल एक तकनीकी प्रक्रिया नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के विकास की नई शुरुआत का संकेत माना जा रहा है।
पेंड्रारोड–गेवरारोड रेल कॉरिडोर परियोजना के तहत पेंड्रारोड से भाड़ी सेक्शन का कार्य पूरा होना एक बड़ी उपलब्धि है। इस नई रेल लाइन के शुरू होने से एशिया की सबसे बड़ी कोयला खदान गेवरारोड से कोयले का परिवहन अब कम दूरी में तेजी से संभव हो सकेगा, जिससे औद्योगिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।

इसके साथ ही गौरेला-पेंड्रा-मरवाही और कोरबा जिले के दूरस्थ क्षेत्रों को पहली बार बेहतर रेल संपर्क मिलने जा रहा है। खासकर कोरवा और पंडो जैसी जनजातियों के लिए यह रेल सेवा मुख्यधारा से जुड़ने का सशक्त माध्यम बनेगी।
भविष्य में इस रेल लाइन के अमरकंटक, डिंडोरी और मंडला तक विस्तार की योजना भी क्षेत्र के समग्र विकास को और गति देगी। यह परियोजना प्रारम्भ होने से भविष्य मे कोरबा से कटनी मार्ग की दुरी कम हो जायगी और इस लाइन मे सवारी ट्रेन भी देखने को मिलेगी,पेंड्रारोड ने इस उपलब्धि के साथ अपने इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जोड़ लिया है।
ट्रायल पूरी तरह सफल रहा है और ट्रैक सभी तकनीकी मानकों पर खरा उतरा है। दिसंबर 2026 तक पूरी 135 किलोमीटर लंबी रेल लाइन का निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा। इस नई रेल लाइन के शुरू होने से क्षेत्र में कोयला परिवहन को काफी गति मिलेगी, जिससे उद्योगों को लाभ होगा। साथ ही भविष्य में इस रूट पर यात्री ट्रेनों के संचालन से आम जनता को भी बेहतर परिवहन सुविधा मिल सकेगी।
कार्तिक पासवान, सीनियर सेक्शन इंजीनियर गति शक्ति बिलासपुर
पहली बार परीक्षण पेंड्रारोड से भाड़ी तक 24 किलोमीटर तक किया गया है।
मोहित सिंह, ठेका कंपनी सुपर वाइजर।
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