रायपुर /24/01/26// प्रदेश में समर्थन मूल्य पर हो रही धान खरीदी की मियाद खत्म होने में अब बमुश्किल चार दिन ही बाकी हैं। तीन दिन का अवकाश होने की वजह से अब 27 से 30 जनवरी तक ही धान खरीदा जाएगा। राज्य सरकार ने अब तक खरीदी की मियाद बढ़ाने को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया है। ऐसी स्थिति में इस बार लाखों किसानों का अपना धान बेचने से वंचित होना तय है। वहीं दूसरी ओर निर्धारित लक्ष्य तक पहुंचना भी मुश्किल नजर आ रहा है।
यह भी पढ़े 👇
धान खरीदी में अव्यवस्था
लगभग सभी जिलों में किसान अभी भी टोकन की बाट जोह रहे हैं। इधर उठाव नहीं होने से सूखत की स्थिति में इस बार ज्यादातर समितियों के डिफॉल्टर होने की भी आशंका बढ़ गई है। धान खरीदी को लेकर जारी अव्यवस्था अंतिम सप्ताह तक भी दुरुस्त नहीं हो पाई है। अब तक टोकन नहीं कटने से धान बेच पाने से वंचित किसानों की चिंता भी बढ़ गई है। समितियों द्वारा लगातार पत्र लिखकर मांग करने के बावजूद लिमिट बढ़ाने पर कोई फैसला नहीं लिया गया। यही वजह है कि किसान अभी भी टोकन के लिए समितियों के चक्कर लगा रहे हैं। समितियों से कर्ज लेकर खेती करने वाले किसान भावी समस्याओं को लेकर भी सशंकित हैं। इस बार टोकन की व्यवस्था के तहत दो एकड़ तक के भूमिस्वामी किसानों को 1 टोकन, 2 से 10 एकड़ के भूमिस्वामी किसानों को 2 टोकन और 10 एकड़ से अधिक भूमिधारी किसानों को 3 टोकन की पात्रता दी गई है। इस बार एक टोकन पात्रता वाले कई किसान भी ऑनलाइन व्यवस्था के चलते चूक गए हैं। ऑनलाइन में पर्याप्त लिमिट नहीं होने की वजह से पात्रता से कम धान बेच पाए हैं। ऐसी ही स्थिति 2 और 3 टोकन वाले किसानों की है। 3 टोकन वाले तो पात्रता के बावजूद वंचित रह गए हैं।
पूर्व के वर्षों में पूर्व थी व्यवस्था
बीते वर्षों तक ऐसे किसानों को धान खरीदी मियाद के लगभग 15 दिन पहले एक अतिरिक्त टोकन जारी किये जाने की व्यवस्था थी। इस बार स्थिति स्पष्ट नहीं है। किसान संगठन अब सोसायटियों से वंचित किसानों की सूची मंगवाकर अतिरिक्त टोकन उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं।
जिले की इन समितियों ने दिया आवेदन
रायपुर जिले की विभिन्न समितियों ने लिमिट बढ़ाने की मांग कर आवेदन दिया है। इनमें सारागांव, नीलजा, पथरी, बरतोरी, सिलयारी, नगरगांव, मोहदी, धरसीवा, देवरी, पंडरभट्ट्ठा समेत अन्य समितियां शामिल हैं। इधर उठाव नहीं होने से सूखत की स्थिति में संबंधित समितियां डिफॉल्टर होने की आशंका जता रही हैं।


