रायपुर। छत्तीसगढ़ के लाखों राशनकार्ड धारियों के लिए इन दिनों एक बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है। खाद्य विभाग की ई-केवाईसी की अनिवार्यता अब आम जनता की थाली पर भारी पड़ने लगी है। आलम यह है कि यदि किसी राशन कार्ड में शामिल पांच सदस्यों में से किसी एक का भी केवाईसी अधूरा है, तो विभाग ने पूरे परिवार का राशन रोक दिया है। नियमों की इस सख्ती के चलते प्रदेशभर में करीब 12 लाख से ज्यादा लोगों को इस महीने सरकारी राशन से वंचित होना पड़ा है, जिसकी गूंज अब खाद्य संचालनालय तक पहुंच गई है। राजधानी रायपुर समेत प्रदेश के तमाम जिलों से ऐसी शिकायतें आ रही हैं जहां पात्र हितग्राही उचित मूल्य दुकानों और खाद्य विभाग के दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
चौकाने वाली बात यह है कि एक तरफ विभाग के आला अधिकारी सार्वजनिक मंचों से यह दावा करते नहीं थकते कि किसी भी गरीब का राशन नहीं रोका जाएगा, लेकिन हकीकत इसके उलट है। ऑनलाइन पोर्टल पर आवंटन ब्लॉक होने की वजह से कोटेदार हितग्राहियों को खाली हाथ लौटा रहे हैं। अकेले रायपुर जिले में ही 15 हजार से अधिक परिवारों का राशन रुक गया है, जिससे मध्यम और निम्न वर्गीय परिवारों के सामने राशन का संकट खड़ा हो गया है। विभाग के अधिकारियों का इस सख्ती के पीछे अपना तर्क है। उनका कहना है कि बार-बार अपील और समय सीमा बढ़ाने के बावजूद बड़ी संख्या में लोग सत्यापन की प्रक्रिया को गंभीरता से नहीं ले रहे थे। फर्जीवाड़े को रोकने और वास्तविक हितग्राहियों की पहचान पुख्ता करने के उद्देश्य से अब यह कड़ा कदम उठाना पड़ा है।
अफसरों का स्पष्ट कहना है कि जब तक कार्ड के हर एक सदस्य का सत्यापन पूरा नहीं होगा, तब तक सिस्टम राशन रिलीज नहीं करेगा। विभाग अब सीधे तौर पर इसे ‘नो केवाईसी, नो राशन’ की नीति पर ले आया है।
हालांकि, इस बढ़ती परेशानी के बीच राहत का एक रास्ता भी बताया गया है। खाद्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि राशन दुकानों में भीड़ लगाने की जरूरत नहीं है, लोग अपने मोबाइल पर ‘मेरा ई-केवाईसी’ ऐप डाउनलोड कर घर बैठे ही इस प्रक्रिया को पूरा कर सकते हैं। इसके बावजूद तकनीकी अज्ञानता और ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या के कारण बड़ी आबादी अभी भी दफ्तरों के बाहर कतारों में खड़ी नजर आ रही है। अब देखना यह होगा कि जन आक्रोश को देखते हुए सरकार नियमों में कुछ ढील देती है या केवाईसी के इस पेच में आम जनता ऐसे ही पिसती रहेगी।

