अकाली दल ने आम आदमी पार्टी सरकार पर लुधियाना नगर निगम की सीमा में 110 गांवों को शामिल कर जमीन हड़पने की साजिश रचने का आरोप लगाया है। सुखबीर बादल के अनुसार, यह “बैक डोर” से जमीन अधिग्रहण का प्रयास है, जिससे ग्रामीणों पर अनावश्यक करों का बोझ पड़ेगा और उनकी साझा जमीनों का स्वामित्व खतरे में पड़ जाएगा। अकाली दल ने इस कदम का पुरजोर विरोध करने की घोषणा की है।
HighLights
- अकाली दल ने AAP सरकार पर जमीन हड़पने का आरोप लगाया।
- 110 गांवों को नगर निगम में शामिल करने का विरोध।
- ग्रामीणों पर करों का बोझ और साझा जमीन का खतरा।
शिरोमणि अकाली दल ने आम आदमी पार्टी सरकार पर लुधियाना से सटे इलाकों में कथित तौर पर “बैक डोर” से जमीन हड़पने की योजना लागू करने का आरोप लगाया है। अकाली दल अध्यक्ष सुखबीर बादल का कहना है कि पहले जब सरकार ने लुधियाना से सटे 30 गांवों में 25 हजार एकड़ जमीन अधिग्रहित करने का फैसला लिया था, तब भी अकाली दल ने तीखा विरोध किया था।
अब वही योजना नए रूप में लागू करने की कोशिश की जा रही है। अकाली दल ने लुधियाना नगर निगम द्वारा नगर निगम की सीमा को बढ़ाकर 110 और गांवों को इसमें शामिल करने के फैसले की कड़ी निंदा की है।
इंटरनेट मीडिया पर सुखबीर बादल का कहना है कि आम आदमी पार्टी सरकार यह कदम ऐसे समय उठा रही है, जब वह मौजूदा नगर निगम सीमा के भीतर ही विकास कार्यों और मूलभूत सुविधाओं को ठीक से संभालने में विफल रही है। इसके बावजूद नगर सीमा का विस्तार कर ग्रामीण इलाकों को निगम में शामिल करना जनता पर अनावश्यक बोझ डालने जैसा है।
लोगों को होगा हार्थिक नुकसान
अकाली दल के अनुसार, इस फैसले से संबंधित गांवों के लोगों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा। नगर निगम सीमा में आने के बाद ग्रामीणों को मकान कर, पानी और सीवरेज शुल्क जैसे कई नए कर चुकाने पड़ेंगे। इसके साथ ही, इस कदम से गांवों की साझा जमीनों का स्वामित्व पंचायतों के हाथ से निकलने का भी खतरा है।
मंशा 110 गांवों की साझा जमीन कब्जाने की
सुखबीर बादल का आरोप है कि आम आदमी पार्टी की मंशा इन 110 गांवों की साझा जमीनों पर कब्जा करने की है, जिनकी कीमत सैकड़ों करोड़ रुपये बताई जा रही है। अकाली दल का दावा है कि इन जमीनों को बाद में पार्टी के करीबी लोगों, बिल्डरों और औद्योगिक घरानों को नियमों को दरकिनार कर सौंपा जाएगा।
अकाली दल करेगा विरोध
अकाली दल ने स्पष्ट किया कि जैसे पहले भूमि पूलिंग योजना के मामले में विरोध किया गया था, वैसे ही इस योजना को भी किसी कीमत पर सफल नहीं होने दिया जाएगा। पार्टी नेताओं ने कहा कि वे इस फैसले का पूरी ताकत से विरोध करेंगे और पंजाबियों के हितों के खिलाफ बताए जा रहे इस कदम को हर हाल में रोका जाएगा।

