प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक विक्रम मंडावी ने सरकार से पुनर्वास नीति, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों की संख्या और इनामी राशि के वितरण की स्थिति पर स्पष्ट जानकारी मांगी।
पुनर्वास नीति में क्या प्रावधान?
गृह मंत्री के अनुसार, राज्य सरकार की नक्सल पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वालों को प्रारंभिक सहायता राशि, कौशल प्रशिक्षण, आवास, आजीविका के साधन और सुरक्षा प्रदान की जाती है। अब तक प्रारंभिक सहायता के रूप में 5 करोड़ 64 लाख रुपये वितरित किए जा चुके हैं।
हालांकि, इनामी नक्सलियों को दी जाने वाली 49 करोड़ 34 लाख रुपये की राशि अभी शेष है। मंत्री ने बताया कि सरेंडर करने वाले नक्सलियों के लिए राशि बैंक खातों में जमा की जा रही है, जिसे वे तीन वर्ष की अवधि पूरी होने के बाद निकाल सकेंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वे मुख्यधारा में स्थायी रूप से जुड़ें और पुनः हिंसक गतिविधियों की ओर न लौटें।
विपक्ष ने क्या पूछा?
विधायक विक्रम मंडावी ने यह भी जानना चाहा कि कितने इनामी नक्सलियों को अब तक पूरी राशि दी जा चुकी है और किन मामलों में भुगतान लंबित है। इस पर सरकार ने कहा कि प्रक्रिया चरणबद्ध है और पात्रता के अनुसार भुगतान किया जा रहा है।
सरकार का दावा
सरकार का कहना है कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई और पुनर्वास नीति के संयोजन से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव दिख रहा है। आत्मसमर्पण करने वालों को समाज में पुनर्स्थापित करने के लिए विभिन्न विभागों के माध्यम से रोजगारपरक योजनाओं से जोड़ा जा रहा है। सदन में इस मुद्दे पर सत्ता और विपक्ष के बीच संक्षिप्त बहस भी हुई, जिसमें पुनर्वास की पारदर्शिता और निगरानी तंत्र को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

