कोरबा/ पसान// जिले में वन विभाग ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध लकड़ी तस्करी के खिलाफ सख्त कदम उठाया है। इस बार वन अमले ने फिल्मी अंदाज में पीछा कर साल लकड़ी से भरे एक ट्रक को पकड़ने में सफलता हासिल की। इस कार्रवाई से क्षेत्र में सक्रिय लकड़ी तस्करों में हड़कंप मच गया

मामला कटघोरा वनमंडल के पसान वन परिक्षेत्र का है। दरअसल शनिवार की देर रात वनमंडाधिकारी कुमार निशांत को मुखबीर से सूचना मिली कि वन परिक्षेत्र पसान के लैंगा परिसर के ग्राम रामपुर के राजस्व क्षेत्र में काटे गए साल प्रजाति के पेड़ को ट्रक में लोड कर ले जाया जा रहा है। मुखबीर की सूचना मिलते ही वनमंडलाधिकारी हरकत में आ गए। उन्होंने उप वनमंडाधिकारी कटघोरा संजय त्रिपाठी के मार्गदर्शन तथा पसान रेंजर मनीष सिंह के नेतृत्व में कार्रवाई के लिए टीम गठित कर दिया। इस टीम में वनपाल ईश्वर दास मानिकपुरी, कौशल प्रसाद द्विवेदी और सुरक्षा श्रमिक भीमसेन को शामिल किया गया। वन विभाग की टीम मौके पर घात लगाकर बैठी थी। इसी दौरान कक्ष क्रमांक 650 के समीप रात करीब 1.40 बजे एक ट्रक पर टीम की नजर पड़ी। वन अमले ने ट्रक को रोकने का प्रयास किया, लेकिन चालक ने रफ्तार बढ़ा दी, जिससे वन कर्मियों का संदेह यकीन में बदल गया। उन्होंने ट्रक का पीछा करना शुरू कर दिया। वन विभाग की टीम को पीछा करते देख चालक घबरा गया। वह पकड़े जाने के भय से रामपुर धवलपुर मार्ग मे ट्रक को लावारिस हालत में छोड़ भाग निकला। मौके पर पहुंची टीम ने ट्रक क्रमांक एमपी 17 एचएच 3677 का निरीक्षण किया, तो उसमे साल प्रजाति का लट्ठा लोड मिला। टीम चालक की व्यवस्था कर लकड़ी से भरे ट्रक को परिक्षेत्र कार्यालय ले आई। मामले में साल प्रजाति के 15 नग लट्ठे से भरे ट्रक को जप्त कर लिया है। टीम द्वारा जप्त लकड़ी की तादाद 6.50 घन मीटर है, जिसकी कीमत करीब 3 लाख रूपए आंकी गई है। खास तो यह है कि जप्त लकड़ी में वन विभाग द्वारा लिखा गया आंकड़ा भी दर्ज मिला है। मामले में वन अधिनियम 1927 की धारा 52,55,42 (1) (2) व छग परिवहन (वनोपज) की धारा 3,10 के तहत कार्रवाई की गई है। साथ ही ट्रक के मालिक और फरार चालक की तलाश भी शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि इस तस्करी नेटवर्क के तार शहर और अन्य जिलों से जुड़े हो सकते हैं।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अवैध लकड़ी तस्करी पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। इस कार्रवाई को विभाग की बड़ी सफलता माना जा रहा है, जिससे भविष्य में तस्करी पर अंकुश लगने की उम्मीद है।

सुलगते सवाल 👇👇
इस इलाके में लकड़ी तस्करी पहले से चल रही थी या यह पहली बड़ी घटना है?
मुखबिर ने सूचना वनमंडाधिकारी कुमार निशांत को सीधे दी क्या उन्हें रेंजर पर भरोसा नहीं था??
पसान रेंजर ने कार्यवाही के बाद अपना मोबाइल no 9691866644 स्विच ऑफ रखा, वह वन विभाग की सफलता बताने के लिए मिडिया से रु बरु क्यों नहीं हुए??
क्या इस तस्करी में कोई बड़ा गिरोह या नेटवर्क शामिल है?
ट्रक मालिक और असली मास्टरमाइंड तक पहुंचने के लिए क्या कार्रवाई की जा रही है?
क्या स्थानीय स्तर पर वन कर्मियों की मिलीभगत की जांच होगी?
जिस क्षेत्र से पेड़ काटे गए, वहां निगरानी व्यवस्था कितनी मजबूत है?
क्या पहले भी इसी रूट से लकड़ी तस्करी की घटनाएं सामने आई हैं?
जब्त लकड़ी की सुरक्षा और आगे की कानूनी प्रक्रिया क्या होगी?
क्या इस मामले में अन्य राज्यों से जुड़े लिंक की जांच की जा रही है?
भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए विभाग क्या ठोस कदम उठाएगा?
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