भारत में मानसून के लिए ‘विलेन’ बन सकता है अल नीनो, 20 सालो में 10 में से 7 बार बिगाड़ चुका है बारिश का खेलल

IMG-20230522-WA0021
previous arrow
next arrow
CG City News

भारत में इस साल अल नीनो के मजबूत होने की संभावना है, जिससे मॉनसून सामान्य से कम रहने का अनुमान है।

  1. इस साल अल नीनो पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो सकता है
  2. IMD ने सामान्य से कम मॉनसून बारिश का अनुमान लगाया है
  3. हिंद महासागर की स्थिति अल नीनो का असर कम कर सकती है

 भारत में इस साल अल नीनो पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा मजबूत हो सकता है। IMD ने अपने मॉनसून अनुमान में कहा, इस साल होने वाली बारिश सामान्य से कम रहने की उम्मीद है। अमेरिका और यूरोप की मौसम एजेंसियों ने हाल ही में जो अनुमान जारी किए हैं, उनके मुताबिक अगले दो-तीन महीनों में अल नीनो का असर शुरू हो जाएगा। इसके साथ ही, यह भी कहा गया है कि इस बार अल नीनो पहले के अनुमानों से कहीं ज्यादा मजबूत हो सकता है।

प्रशांत महासागर में बदलते मौसम का भारत पर असर

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, 1980 के बाद से, जितने भी अल नीनो वाले साल रहे हैं, उनमें से लगभग 70% सालों में गर्मियों का मॉनसून कमजोर रहा है। इससे यह पता चलता है कि प्रशांत महासागर में स्थितियों के बदलते ही भारत में जून से सितंबर के बीच होने वाली बारिश पर इसका असर साफ तौर पर पड़ता है।

रिपोर्ट में आगे बताया गया कि, ऐसे कुल 13 सालों में से, सात सालों में मॉनसून में कमी या भारी कमी देखी गई। इसमें दो सालों में यह सामान्य से कम (90-96%) रहा; तीन सालों में सामान्य रहा; और एक साल में सामान्य से ज्यादा रहा। जिन दो सालों में मॉनसून सामान्य से कम रहा, उनमें साल 2018 और साल 2002 था; जब मॉनसून में भारी कमी दर्ज की गई थी।

साल 2014 में अल नीनो रहा था बेअसर

इसके अलावा, कुछ साल ऐसे भी रहे हैं। जैसे कि 2014, जब प्रशांत महासागर में बढ़ती गर्मी ने मॉनसून पर असर डाला, भले ही उस साल अल नीनो पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाया था। अल नीनो के दौरान, पूर्वी और मध्य उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर की सतह का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है। इसकी वजह से हवा के बहाव के तरीकों में बदलाव आता है, जिसका असर दुनिया भर के मौसम पर अलग-अलग तरीकों से पड़ता है।

हालांकि, कुछ ऐसे खास उदाहरण भी देखने को मिले हैं जब अल नीनो के बावजूद मॉनसून सामान्य ही रहा। इसका सबसे ज्यादा जिक्र किया जाने वाला उदाहरण 1997 का है। उस साल अल नीनो अपने अब तक के सबसे मजबूत रूप में था, लेकिन भारत में जून से सितंबर के बीच होने वाली बारिश सामान्य ही रही।

उस साल, हिंद महासागर की स्थितियां, जिसे ‘इंडियन ओशन डाइपोल’ नामक घटना के रूप में जाना जाता है। भारत में अच्छी बारिश के लिए बेहद अनुकूल थी। माना जाता है कि इन्हीं स्थितियों ने अल नीनो के असर को काफी हद तक बेअसर कर दिया था।

CG City News


CG City News

Related Articles

[td_block_social_counter facebook="tagdiv" twitter="tagdivofficial" youtube="tagdiv" style="style8 td-social-boxed td-social-font-icons" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLWJvdHRvbSI6IjM4IiwiZGlzcGxheSI6IiJ9LCJwb3J0cmFpdCI6eyJtYXJnaW4tYm90dG9tIjoiMzAiLCJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBvcnRyYWl0X21heF93aWR0aCI6MTAxOCwicG9ydHJhaXRfbWluX3dpZHRoIjo3Njh9" custom_title="Stay Connected" block_template_id="td_block_template_8" f_header_font_family="712" f_header_font_transform="uppercase" f_header_font_weight="500" f_header_font_size="17" border_color="#dd3333"]

Latest Articles

error: Content is protected !!