केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने सोमवार को लोकसभा में बताया कि सरकारी बैंकों ने पिछले साढ़े पांच वर्ष के दौरान 6.15 लाख करोड़ रुपए का लोन राइट आफ यानी बट्टे खाते में डाला है। एक लिखित जवाब में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वित्त वर्ष 2022-23 से सरकार ने सरकारी बैंकों में कोई पूंजी नहीं डाली है। सरकारी बैंकों ने अपने वित्तीय प्रदर्शन में काफी सुधार किया है। वे लाभ में आए हैं और अपनी पूंजीगत स्थिति मजबूत की है। सरकारी बैंक अब अपनी पूंजीगत जरूरतों के लिए बाजार और आंतरिक स्त्रोतों पर निर्भर हैं।

क्या कहती है आरबीआई की पॉलिसी?

सरकारी बैंकों ने एक अप्रैल 2022 से 30 सितंबर 2025 तक इक्विटी और बांड के जरिए 1.79 लाख करोड़ रुपए जुटाए हैं। उन्होंने बताया कि आरबीआई की गाइडलाइंस और बैंकों के बोर्ड से मंजूर पालिसी के मुताबिक, किसी भी एनपीए को चार वर्ष पूरा होने पर उसे राइट ऑफ किया जाता है और उसके लिए प्रोविजनिंग की जाती है।

ऐसे राइट आफ से कर्ज लेने वालों को देनदारी से कोई छूट नहीं मिलती है। राइट आफ किए गए लोन की वसूली एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है और बैंक अपने पास मौजूद अलग-अलग वसूली प्रणाली के जरिये कार्रवाई जारी रखते हैं।

एक अन्य सवाल के जवाब में चौधरी ने कहा कि पिछले साढ़े चार वर्ष में धोखाधड़ी के 5,83,291 मामले पंजीकृत हुए हैं। इनमें 3,588.22 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी हुई है। इसमें से 238.83 करोड़ रुपए की वसूली की जा चुकी है।

वित्त वर्ष 2027-28 से पहले अधिसूचित हो जाएंगे नए आईटीआर फार्म

वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने सोमवार को कहा कि आयकर अधिनियम, 2025 के आधार पर नए आयकर रिटर्न (आईटीआर) फार्म वित्त वर्ष 2027-28 से पहले अधिसूचित हो जाएंगे। लोकसभा में एक लिखित उत्तर में चौधरी ने कहा कि आईटीआर फार्म के सरलीकरण के लिए बनी सीबीडीटी की समिति कर विशेषज्ञों, संस्थागत निकायों और आयकर विभाग की क्षेत्रीय इकाइयों के साथ व्यापक परामर्श कर रही है।

चालू वित्त वर्ष में अर्जित आय के लिए रिटर्न फार्म के संबंध में चौधरी ने कहा कि आइटीआर फार्म का समेकन और सरलीकरण प्रक्रिया में है। इन्हें आयकर अधिनियम, 1961 के प्रविधानों के अनुसार अधिसूचित किया जाएगा।