बिलासपुर /मामला है चर्च ऑफ़ क्राइस्ट इन इंडिया बिलासपुर के कब्रस्तान की जमीन के बिक्री होने का जिसे अंजाम देने वाला, मास्टरमाइंड और कोई नहीं उसी संस्था में खुद कोषाध्यक्ष पद पर बैठा हुआ है जिसे ना ही अपने समाज के लोगो की चिंता है और ना ही उनकी जो अब इस दुनिया में नहीं रहे। जमीन को बेचने वालो ने ना ही सोचा धर्म के बारे में ना ही सोचा उससे जुड़े लोगो की भावनाओ के बारे में और पैसे के लालच में अंधे होकर बेच दी करोडो की जमीन कौड़ियों के भाव।
जैसे की आप सबको पता है की चर्च ऑफ़ क्राइस्ट मिशन इन इंडिया की बिलासपुर मे स्थित करोडो की जमीन जिसका खसरा क्रमांक 296/1 है को उसी संस्था में बैठे पदाधिकारियों ने वर्तमान पाली-तानाखार विधायक मोहितराम केरकेट्टा और उसके सुपुत्र शंकर लाल केरकेट्टा को कौड़ियों के दाम बेच दिया था।
सीजी सिटी न्यूज़ की बिलासपुर संभाग की टीम ने उस जमीन में सच्चाई इस वीडियो के माध्यम से आप पाठको के समक्ष लाने की कोशिश की है।
दिनांक 3 सितम्बर 2023 को सीजी सिटी न्यूज़ की टीम पहुंची चर्च ऑफ़ क्राइस्ट मिशन इन इंडिया की बिलासपुर में स्थित उस कब्रस्तान की जमीन पर और जब वह जाकर देखा तो वहा की सच्चाई को काफी विपरीत पाया जो जमीन बिक्री होते वक़्त संस्था के पदाधिकारियों द्वारा उनके द्वारा किये गए घोषणा पत्र पर दर्शाई गयी थी।
पदाधिकारियों द्वारा जमीन बिक्री के दौरान किये गए घोषणा पत्र की प्रतिलिपि सलंग्न है।


जमीन बिक्री के वक़्त घोषणा पत्र के मुख्य बिंदु जो पदाधिकारियों द्वारा लिखित तौर पर कहे गए थे:
1. भूमि पर किसी प्रजाति के वृक्ष नहीं है:
यह कथन जो संस्था के पदाधिकारियों द्वारा दिया गया है की बिक्रीत जमीन जिसका खसरा क्रमांक 296/1 है, मे किसी भी प्रकार के वृक्ष नहीं है, पूरी तरह से झूठ है। उस बिक्रीत जमीन पर एक नहीं कम से कम 50 से ज्यादा वृक्ष है जो काफी बड़े और पुराने है जिनमे बांस, नीम, सीसम, बबूल एवं अन्य वृक्ष भी मौजूद है। आपको यह वृक्ष वीडियो फुटेज में आसानी से दिखाई दे सकते है लेकिन उस वक़्त जमीन बेचने वाले पदाधिकारियों को नहीं दिखाई दिए क्युकी पैसे के लोभ-लालच मे वो अंधे हो चुके थे।
2. भूमि पर निर्माण नहीं है:
यह घोषणा भी जो पदाधिकारियो द्वारा की गयी थी की जिस जमीन के टुकड़े को बेचा गया है वो कब्रस्तान की भूमि है ही नहीं,यह बात भी पूरी तरह असत्य है जबकि उक्त भूमि जिसका खसरा क्रमांक 296/1 है, मौजदा जमीन पर स्व अनीश राम मसीह की कब्र मौजूद है जिनकी मृत्यु सन 1984 मे हुयी थी। इसके अलावा कब्रस्तान के चौकीदार सुखदेव तिर्की एवं उनका परिवार भी उस भूमि पर काफी लम्बे समय से घर बनाकर रह रहा है। ऐसे छोटे छोटे और भी निर्माण उस भूमि पर मौजूद है। ये सारे निर्माणों को आप वीडियो फुटेज में देख सकते है। अतः यह घोषणा भी की उक्त भूमि पर कोई निर्माण नहीं है, असत्य है।
इसके अलावा ऐसे और भी कई बिन्दुओ पर साफ़ साफ़ झूठ बोला गया है, जिससे यह प्रतीत होता है कि संस्था के पदाधिकारी एवं मास्टरमाइंड हैमिलटन थॉमस और उसके साथियो द्वारा इस जमीन को झूठ और छलावा कर, फ़र्ज़ी तरीके से बिक्री किया गया है।
क्यों बेचनी पड़ी करोड़ो की जमीन, कौड़ियों के दाम ?
यह पूरा मामला माननीय उच्च न्यायलय मे दर्ज़ है जिसपर अभी भी मुक़दमा लड़ा जा रहा है संस्था पदाधिकारियों से जब पूछा गया की जमीन को बेचने की क्या जरुरत पड़ी तब उनका कथन यह आया की संस्था के तकरीबन 107 कर्मचारियों की पी एफ राशि का भुगतान संस्था को करना है जिसकी राशि तकरीबन 1 करोड़ 80 लाख रूपये है जिस कारण संस्था कब्रस्तान की जमीन के एक टुकड़े जिसका खसरा क्रमांक 296/1 है, को बिक्री करना पड़ा।
इस जमीन को 99 लाख 22 हजार 500 रुपये मे पाली तानाखार के विधायक मोहतराम केरकेट्टा एवं उसके सुपुत्र शंकरलाल केरकेट्टा को बेच दिया गया है।
नहीं हुआ है पी एफ राशि का भुगतान ?
काफी जांच पड़ताल करने के बाद यह पता चला की जिस उद्देश्य के लिए जमीन बेचीं गयी है यानी कर्मचारियों के पी एफ भुगतान हेतु उसका भुगतान हुआ ही नहीं है यानी एक तो पहले करोडो की जमीन को सस्ते में बेचा, उसके बाद झूठ बोला की कर्मचारियों के हित के लिए बेचा है, फिर वो पैसा दिया ही नहीं।
यही नहीं जब पी एफ भुगतान राशि 1 करोड़ 80 लाख है तो फिर 80 लाख रुपये के घाटे उस जमीन को बेचने का क्या फायदा ?
वर्तमान में इस संस्था और इसके कर्मचारियों के साथ का पी एफ भुगतान राशि भुगतान को लेकर मुक़दमा भी काफी लम्बे वक़्त से चल ही रहा है जिसका प्रकरण WPL/25/2019 क्रमांक से माननिया उच्च न्यायलय छत्तीसगढ़ में दर्ज़ भी है लेकिन जमीन बिक्री होने के तुरंत लगभग 2 माह बाद मास्टरमाइंड हैमिलटन थॉमस और उसके साथियो ने उच्च न्यायलय से 14.02.2022 को स्टे भी ले लिया।
वीडियो में दिखाए गए प्रमाण सत्य है एवं वर्तमान समय में वहाँ पर मौजूद है, कुछ वर्ष पूर्व जब उस जमीन के बगल स्मार्ट रोड नहीं बनी थी, जब यह जमीन मिटटी तेल गली कहलाये जाने वाले रोड के बगल में थी तब तक इस जमीन को कब्रस्तान की ही जमीन इस संस्था के पदाधिकारी ही बोलते थे लेकिन जब देखा रोड बन चुकी है चंद रुपयों के लालच में आकर इस जमीन को बेच दिया गया और आम जनता एवं उस समाज के लोगो से यह झूठ बोला गया की यह जमीन कब्रस्तान की भूमि नहीं है।
जमीन को पूर्णतः फ़र्ज़ी तरीके से, धोखे मे रखकर बेचा गया है।
इस मुद्दे की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए क्योंकि करोडो की जमीन को कौड़ियों के दाम बेचा गया है और सरकार से टैक्स बचाने के लिए हो सकता है मनी लॉन्डरिंग भी किया गया हो खैर ये तो जांच का विषय है ही लेकिन उक्त प्रकरण से रिलेटेड सारी जानकारी इस लिंक पर मौजूद है पढ़ने के लिए Click Here
इस पूरे प्रकरण से एक बात तो समझ में आती है, की पैसा इंसान को इतना अँधा बना देता है की उसकी साड़ी मानवीय भावनाये ख़तम हो जाती है इस मामले से यह बात जाहिर है की लालची लोगो ने मुर्दो तक की जमीन को बेच खाया।

