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Thursday, April 16, 2026

सियासी त्रिकोण में उलझे ट्रंप: ओबामा और बाइडेन के बीच बढ़ी राजनीतिक खींचतान

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CG City News

अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प

लोकप्रियता में रिकॉर्ड गिरावट झेल रहे राष्ट्रपति ट्रम्प, कल पहली चुनावी परीक्षा

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दोबारा चुने जाने को 5 नवंबर को एक वर्ष पूरा होने जा रहा है। किंतु उससे एक दिन पूर्व, यानी 4 नवंबर 2025 को, उनके सामने अब तक की सबसे बड़ी चुनावी परीक्षा होने वाली है। इसी दिन न्यूयॉर्क सिटी में नए मेयर का चुनाव होगा, साथ ही वर्जीनिया और न्यूजर्सी राज्यों में गवर्नर और विधानसभा चुनाव भी संपन्न होंगे।

पिछले एक वर्ष में ट्रम्प ने अपनी आर्थिक और आव्रजन नीतियों के माध्यम से रिपब्लिकन समर्थकों को तो जोड़े रखा है, परंतु आम जनता के बीच असंतोष बढ़ता गया है। नवंबर की शुरुआत में उनकी नेट अनुमोदन रेटिंग (Approval Rating) घटकर -18% तक पहुंच गई है, जो पूर्व राष्ट्रपतियों बराक ओबामा और जो बाइडेन के प्रथम वर्ष की तुलना में कहीं अधिक नकारात्मक है। ओबामा के पहले वर्ष के अंत में यह आंकड़ा -3%, जबकि बाइडेन के कार्यकाल में -7% रहा था।

विश्लेषकों का मत है कि टैरिफ, महंगाई और आव्रजन पर कठोर रुख ने ट्रम्प को मध्यवर्गीय और शहरी मतदाताओं से दूर कर दिया है। अब उनके सामने यह चुनौती है कि क्या ये स्थानीय चुनाव आगामी समय के राष्ट्रीय जनभावना (National Mood) का संकेत देंगे, अथवा स्थानीय मुद्दे निर्णायक सिद्ध होंगे। वॉशिंगटन से लेकर वर्जीनिया और न्यूयॉर्क तक सभी की निगाहें मंगलवार पर टिकी हैं, क्योंकि यही दिन तय करेगा कि ट्रम्प का दूसरा कार्यकाल जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतर रहा है या नहीं।
रिपब्लिकन इस परीक्षा को अपनी नीतियों की मजबूती का प्रमाण मान रहे हैं, जबकि डेमोक्रेट इसे एक “मिनी जनमत-संग्रह” (Mini Referendum) के रूप में देख रहे हैं।


न्यूयॉर्क : सबसे हाई-प्रोफाइल मुकाबले में भारतवंशी ममदानी 14 अंक आगे

जोहरान ममदानी — भारतीय मूल के 33 वर्षीय युवा नेता हैं, जो न्यूयॉर्क स्टेट असेंबली के सदस्य भी हैं। वे प्रसिद्ध युगांडा-जनित लेखक महमूद ममदानी और फिल्म निर्माता मीरा नायर के पुत्र हैं।
ममदानी एक डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट हैं और उन्हें प्रगतिशील मतदाताओं, युवाओं, अफ्रीकी-अमेरिकी तथा लैटिन समुदायों का प्रबल समर्थन प्राप्त है। अपने चुनाव प्रचार में उन्होंने शहर की बढ़ती जीवन-यापन लागत को मुख्य मुद्दा बनाया है और वादा किया है कि वे अमीरों पर कर (टैक्स) लगाकर गरीब तबकों के लिए सस्ते आवास योजनाएँ लाएंगे।
चुनावी सर्वेक्षणों में ममदानी 14 प्रतिशत अंकों की बढ़त बनाए हुए हैं।

राष्ट्रपति ट्रम्प ने ममदानी को लेकर चेतावनी दी है कि यदि वे मेयर बने तो न्यूयॉर्क की संघीय सहायता निधि रोक दी जाएगी।

एंड्रयू कूमो — 67 वर्षीय पूर्व गवर्नर, जिन्होंने यौन उत्पीड़न के आरोपों के चलते चार वर्ष पूर्व इस्तीफा दिया था, इस चुनाव में स्वतंत्र प्रत्याशी के रूप में मैदान में हैं। उन्हें रिपब्लिकन और मध्यमार्गी मतदाताओं का समर्थन प्राप्त है।
राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपनी ही पार्टी के प्रत्याशी की बजाय कूमो का समर्थन किया है, क्योंकि वे ममदानी की जीत रोकना चाहते हैं।

न्यूयॉर्क पारंपरिक रूप से डेमोक्रेटिक गढ़ रहा है। ट्रम्प ने कूमो को अनुभवी और व्यावहारिक नेता बताया है, यद्यपि उन पर पूर्व में भ्रष्टाचार और यौन दुराचार के आरोप लग चुके हैं। कूमो ने चुनावी वादा किया है कि वे शहर की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करेंगे और राजनीतिक स्थिरता स्थापित करेंगे। तथापि, सर्वेक्षणों में उनकी लोकप्रियता ममदानी से कम है।


दो राज्यों के गवर्नर चुनाव : वर्जीनिया और न्यूजर्सी में डेमोक्रेट आगे, शटडाउन बना बड़ा मुद्दा

न्यूयॉर्क मेयर चुनाव के साथ-साथ वर्जीनिया और न्यूजर्सी, इन दो डेमोक्रेटिक राज्यों में भी गवर्नर चुनाव हो रहे हैं।
वर्जीनिया में डेमोक्रेट अबीगेल स्पैनबर्गर 7 प्रतिशत अंकों से रिपब्लिकन विन्सम सीयर्स से आगे चल रही हैं। यहां संघीय शटडाउन का असर प्रमुख चुनावी मुद्दा बन गया है।

वहीं न्यूजर्सी में डेमोक्रेट मिक्की शेरिल 3 अंकों की बढ़त के साथ रिपब्लिकन जैक सियाटरेली से आगे हैं। शेरिल ने अपने प्रतिद्वंद्वी द्वारा स्वयं को “ट्रम्प ऑफ ट्रेंटन” कहे जाने पर पलटवार करते हुए ट्रम्प की टैरिफ नीति और शटडाउन को चुनावी मुद्दा बनाया है।


ट्रम्प का दांव उलटा पड़ा : प्रवासी इलाकों में आईसीई छापों से भड़का आक्रोश

वोटिंग के बीच प्रवासी समुदायों में आईसीई (Immigration and Customs Enforcement) की बढ़ती कार्रवाइयों से लैटिन अमेरिकी समुदाय में गहरा रोष फैल गया है। फेडरल एजेंटों की उपस्थिति और छापेमारी के कारण कई प्रवासी मतदाता वोट डालने से भयभीत हुए हैं।

आईसीई का कहना है कि उनकी कार्रवाई केवल आपराधिक संदिग्धों तक सीमित है, जबकि डेमोक्रेटिक नेताओं का आरोप है कि यह सब लैटिन मतदाताओं के मतदान को दबाने की साजिश है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इन दोनों राज्यों में यह नाराजगी अब ट्रम्प प्रशासन के विरुद्ध वोट में परिवर्तित होती दिख रही है।


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