कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश मोटरयान नियमावली 1998 में संशोधन करते हुए मोटरयान समूह व वितरण सेवा प्रदाता नियमावली-2026 को भी स्वीकृति दी है। इसके तहत अब प्रदेश में ओला और उबर जैसी कंपनियों को चार पहिया वाहनों के संचालन के लिए अनिवार्य रूप से रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस लेना होगा।

रजिस्ट्रेशन के लिए 25 हजार रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है, जबकि लाइसेंस के लिए पांच लाख रुपये देने होंगे। एक बार लाइसेंस मिलने के बाद कंपनी कितने भी वाहन संचालित कर सकेगी। लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए पांच हजार रुपये शुल्क तय किया गया है।

परिवहन मंत्री ने बताया कि परिवहन निगम भी जल्द अपना मोबाइल एप विकसित करेगा, जबकि कंपनियों के अपने एप भी रहेंगे। इन एप पर वाहनों की फिटनेस, पुलिस सत्यापन, रजिस्ट्रेशन और अन्य जरूरी जानकारी उपलब्ध रहेगी।

हालांकि, अनुबंधित बसों को अतिरिक्त रियायत देने से जुड़ा प्रस्ताव अभी लंबित है और इसे कुछ संशोधनों के साथ दोबारा लाया जाएगा।

भारत सरकार के नियम को उत्तर प्रदेश भी अपनाएगा

परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने कैबिनेट बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में बताया कि यूपी में अब ओला व उबर को भी पंजीकरण कराना होगा। परिवहन मंत्री ने मोटर व्हीकल एक्ट 1988 की धारा 93 का जिक्र किया और बताया कि भारत सरकार ने 1 जुलाई 2025 को नियमावली में संशोधन किया है।

भारत सरकार के नियम को उत्तर प्रदेश भी अपनाएगा। ओला-उबर पर पहले नियंत्रण नहीं था, लेकिन अब इन्हें भी पंजीकरण कराना पड़ेगा। आवेदन, लाइसेंस और रिन्यूअल शुल्क भी देना होगा। कौन गाड़ी चला रहा है, यह अभी तक हम नहीं जान पाते थे। इनका ड्राइवर का मेडिकल, पुलिस वेरिफिकेशन तथा फिटनेस टेस्ट आदि भी कराएंगे।

परिवहन मंत्री ने बताया कि अब यूपी में बिना पंजीकरण शुल्क, फिटनेस, मेडिकल टेस्ट, पुलिस वेरिफिकेशन के गाड़ी नहीं चला पाएंगे। अधिसूचना जारी होने के बाद यह लागू हो जाएगी। आवेदन की फीस 25 हजार रुपये होगी, जबकि 50-100 या इससे अधिक गाड़ी चलाने वाली कंपनी की लाइसेंसिंग फीस पांच लाख रुपये होगी।

रिन्यूअल हर पांच साल पर होता रहेगा। रिन्यूअल के लिए पांच हजार रुपये देना होगा। परिवहन मंत्री ने बताया कि ऐसा ऐप भी विकसित करेंगे, जिससे समस्त जानकारी पब्लिक डोमेन में रहे। इसके तहत ड्राइवर आदि की समस्त जानकारी भी प्राप्त होगी।