कोरबा // जिले में धान खरीदी की अवधि 31 जनवरी 2026 तक होने से किसानों में संतोष और राहत का माहौल है। पर्याप्त समय मिलने से किसान अब बिना किसी चिंता के मिंजाई और खेत के शेष कार्य पूरे कर पा रहे हैं। शासन की पारदर्शी और किसान-हितैषी खरीदी व्यवस्था से कृषक वर्ग पूरी तरह संतुष्ट नजर आ रहा है।
कोरबा जिलान्तर्गत पोड़ी-उपरोड़ा क्षेत्र के किसान सोन साय लगभग चार से पाँच एकड़ भूमि में धान की खेती करते हैं। इस वर्ष वे अब तक केवल 10 क्विंटल धान ही बेच पाए हैं, क्योंकि उनके खेतों में अभी भी मिंजाई का कार्य जारी है। सोन साय का कहना है कि धान बेचने को लेकर उन्हें किसी भी प्रकार की चिंता नहीं है। जैसे ही धान पूरी तरह सूखकर तैयार हो जाएगा, वे उपार्जन केंद्र जाकर आसानी से बिक्री कर लेंगे। खरीदी अवधि बढ़ने से उन्हें पर्याप्त समय मिल गया है।
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इसी तरह मिंजाई में जुटे किसान मान सिंह और जदुबर सिंह का भी मानना है कि 31 जनवरी 2026 तक खरीदी की समय-सीमा बढ़ाए जाने से किसानों को बड़ी राहत मिली है। अब वे बिना किसी तनाव के खेत का काम पूरा कर पा रहे हैं और समय पर उपार्जन केंद्र में धान बेचने में सक्षम होंगे। किसानों का कहना है कि पहले समय की कमी के कारण कई बार जल्दबाजी में धान बेचने में परेशानी होती थी, लेकिन अब ऐसी स्थिति नहीं है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के दिशा-निर्देशन में राज्य सरकार द्वारा किसानों के हित में कई महत्वपूर्ण और कल्याणकारी निर्णय लिए गए हैं। धान उपार्जन केंद्रों में पारदर्शी व्यवस्था से खरीदी सुनिश्चित की जा रही है तथा केवल मूल किसानों से ही धान खरीदने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। इससे बिचौलियों पर पूरी तरह अंकुश लगा है और किसानों को उनकी उपज का पूरा मूल्य मिल रहा है।
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जिला प्रशासन द्वारा सभी धान खरीदी केंद्रों में किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आवश्यक व्यवस्थाएँ की गई हैं। घर बैठे ऑनलाइन टोकन की सुविधा, उपार्जन केंद्रों में बैठने की उचित व्यवस्था, पेयजल, छाया तथा अन्य बुनियादी सुविधाएँ किसानों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही हैं। इससे किसानों को लंबी कतारों और अनावश्यक इंतजार से भी मुक्ति मिली है।
बुजुर्ग किसान जदुबर सिंह बताते हैं कि पहले उपार्जन केंद्रों में अव्यवस्थाओं के कारण किसानों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता था। कई बार धान बेचने के लिए रात तक केंद्रों में रुकना पड़ता था, लेकिन अब व्यवस्था पहले से काफी बेहतर हो गई है। किसानों को सम्मानजनक और सुव्यवस्थित माहौल मिल रहा है।
90 वर्षीय किसान पूरण सिंह, जिनके पास लगभग पाँच एकड़ भूमि है, बताते हैं कि वे 10 क्विंटल धान बेच चुके हैं और शेष धान को मिंजाई पूरी होते ही चरणबद्ध रूप से उपार्जन केंद्र भेज रहे हैं। उनका कहना है कि प्रति क्विंटल अधिक मूल्य मिलने और खरीदी अवधि बढ़ने से किसानों को सीधा लाभ हुआ है, खासकर उन किसानों को जिनकी फसल देर से पकती है।
कुल मिलाकर सरकार की सरल, पारदर्शी और किसान-हितैषी धान खरीदी व्यवस्था से किसानों का भरोसा मजबूत हुआ है। अब किसान निश्चिंत होकर अपने कृषि कार्य कर रहे हैं और उन्हें विश्वास है कि उनकी मेहनत की पूरी कीमत उन्हें समय पर और उचित रूप से मिलेगी।

