कोरबा / तुमान / 05/ 01/ 26 //स्कूल के सामने कचरा फैला होना किसी भी समाज के लिए चिंता का विषय है। कोरबा जिले के तूमान स्थित पूर्व माध्यमिक शाला के सामने गंदगी का अंबार लगा हुआ है, जिससे स्कूली बच्चों और आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कोरबा जिले के ग्राम तूमान में स्थित पूर्व माध्यमिक शाला के सामने फैला कचरे का ढेर अब स्थानीय लोगों और स्कूली बच्चों के लिए गंभीर समस्या बनता जा रहा है। विद्यालय के ठीक बगल में बना यह अस्थायी कूड़ेदान बीमारियों को खुला न्योता दे रहा है, जिससे आसपास का वातावरण पूरी तरह दूषित हो चुका है।
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सरकार द्वारा स्कूलों के रखरखाव और स्वच्छता के लिए लाखों रुपये का बजट जारी किया जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात इसके विपरीत नजर आ रहे हैं। देशभर में स्वच्छ भारत मिशन के तहत स्वच्छता अभियान का जोर-शोर से प्रचार किया जा रहा है, वहीं तूमान जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी सच्चाई सामने आ रही है।
🧹 स्वच्छता अभियान बनाम जमीनी हकीकत
ग्राम पंचायत में घर-घर कचरा उठाने की व्यवस्था होने के बावजूद बस स्टैंड, सार्वजनिक स्थल और विद्यालय परिसर गंदगी से पटे हुए हैं। स्कूल के आसपास फैले कचरे से तेज बदबू आती है, जिससे विद्यालय जाने वाले बच्चों, अभिभावकों और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
🚸 बच्चों की सेहत पर मंडरा रहा खतरा
विद्यालय की दीवारों और सीढ़ियों पर पान की पीक, गुटखा और खैनी की थूक से बदसूरत आकृतियां उभर आई हैं। ऐसे माहौल में बच्चों को किताबों में पढ़ाई जाने वाली स्वच्छता की सीख खोखली नजर आती है। जब बच्चों के सामने ही गंदगी का अंबार होगा, तो उनसे स्वच्छ जीवन की उम्मीद कैसे की जा सकती है।
🏫 शिक्षा के मंदिर के पास गंदगी
विद्यालय परिसर और उसके आसपास फैली गंदगी से संक्रमण और बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इसी मार्ग से जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का नियमित आना-जाना रहता है, इसके बावजूद इस गंभीर समस्या पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा।
❗ आमजन में आक्रोश
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही इस कचरे की सफाई नहीं की गई, तो यह क्षेत्र डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का केंद्र बन सकता है। लोगों ने प्रशासन से तत्काल सफाई और स्थायी कूड़ेदान व्यवस्था की मांग की है।
स्वच्छता को लेकर सरकार द्वारा स्वच्छ भारत मिशन चलाया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है।
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