छात्रों और सामाजिक संगठनों की संयुक्त पहल
अरावली पर्वतमाला के संरक्षण को लेकर अजमेर में मंगलवार को एक विशाल जनआंदोलन देखने को मिला। अरावली बचाओ अभियान के तहत शहर के 12 से अधिक स्कूलों और कॉलेजों के छात्र-छात्राओं के साथ-साथ कई सामाजिक, पर्यावरणीय और जनसंगठनों ने मिलकर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने रैली निकालकर कलेक्ट्रेट का घेराव किया और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा।
आजाद पार्क से शुरू हुई रैली
जनआंदोलन की शुरुआत आजाद पार्क से हुई। रैली शहर के प्रमुख मार्गों से होती हुई कलेक्ट्रेट परिसर पहुंची। हाथों में तख्तियां और बैनर लिए प्रदर्शनकारी “अरावली बचाओ”, “खनन बंद करो”, “प्रकृति बचाओ, भविष्य बचाओ” जैसे नारे लगाते नजर आए। पूरे मार्ग में पर्यावरण संरक्षण का संदेश गूंजता रहा।
राष्ट्रपति के नाम सौंपा गया ज्ञापन
कलेक्ट्रेट पहुंचने पर जिला कलेक्टर लोकबंधु के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम संयुक्त ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में अरावली पर्वतमाला के संरक्षण को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की गई। इसमें सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अरावली की नई परिभाषा को निरस्त करने की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई।
नई परिभाषा पर उठे सवाल
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के 20 नवंबर के निर्णय में अरावली को 100 मीटर से अधिक ऊंचाई और 500 मीटर विस्तार तक सीमित करने की बात कही गई है। भले ही इस फैसले पर फिलहाल रोक लगी हो, लेकिन इसे पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बताया गया।
खनन को मिल सकती है खुली छूट
अभियान से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि यह परिभाषा लागू हुई, तो अरावली क्षेत्र के लगभग 90 प्रतिशत हिस्से में खनन को प्रशासनिक मंजूरी मिल सकती है। इससे भूजल स्तर में गिरावट, जैव विविधता का नुकसान और स्थानीय जलवायु पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
पहाड़ियों की संख्या पर भी संकट
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि अरावली की कुल 1281 पहाड़ियों में से केवल 1048 को ही पहाड़ी माना जाएगा। इससे शेष क्षेत्र खनन और अतिक्रमण के लिए खुला रह जाएगा, जो भविष्य के लिए बेहद खतरनाक है।
आंदोलन और तेज करने की चेतावनी
वक्ताओं ने कहा कि अरावली पर्वतमाला लाखों वर्षों से उत्तर भारत के पर्यावरण संतुलन की रीढ़ रही है। यदि इसके संरक्षण को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आंदोलन को और व्यापक स्तर पर ले जाया जाएगा।

