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Thursday, April 16, 2026

ग्लोबल सोच अपनाएं, आत्मनिर्भर भारत बनाएं: IIM रायपुर में एस. जयशंकर का छात्रों को संदेश

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CG City News

छत्तीसगढ़ के नया रायपुर स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान रायपुर में आयोजित 15वें दीक्षांत समारोह में देश के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने छात्रों को संबोधित करते हुए वैश्विक दृष्टिकोण अपनाने और भारत को आत्मनिर्भर बनाने में युवाओं की भूमिका पर जोर दिया। समारोह में बड़ी संख्या में छात्र, अभिभावक और संस्थान के अधिकारी उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में डॉ. जयशंकर ने कहा कि आज का समय तेजी से बदलती वैश्विक परिस्थितियों का है, जहां किसी एक देश में होने वाली घटना का प्रभाव पूरी दुनिया पर पड़ता है। ऐसे माहौल में छात्रों को केवल अपने विषय तक सीमित रहने के बजाय अंतरराष्ट्रीय राजनीति, अर्थव्यवस्था और तकनीकी बदलावों की समझ विकसित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि “ग्लोबल सोच ही आज के युवा को भविष्य के लिए तैयार कर सकती है।”

भारत की प्रगति पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि बीते कुछ वर्षों में देश ने आर्थिक और रणनीतिक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई है। कठिन वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारत ने स्थिरता बनाए रखी है, जो उसकी नीतिगत मजबूती और क्षमता को दर्शाता है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत अब वैश्विक मंच पर अधिक प्रभावी भूमिका निभा रहा है।

बुनियादी ढांचे और तकनीकी विकास का उल्लेख करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि देश में सड़कों, रेल नेटवर्क और बंदरगाहों का तेजी से विस्तार हुआ है। साथ ही डिजिटल क्रांति ने व्यापार और आम जीवन को आसान बनाया है। इन विकासों ने युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर पैदा किए हैं।

आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनना देश की प्राथमिकता होनी चाहिए। इससे न केवल भारत की वैश्विक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि देश आंतरिक रूप से भी अधिक सक्षम बनेगा।

विदेश नीति के महत्व को समझाते हुए उन्होंने कहा कि यह केवल कूटनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापार और उद्योग को अंतरराष्ट्रीय बाजार में आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी है। उन्होंने छात्रों को प्रेरित किया कि वे अपने कौशल और ज्ञान का उपयोग करते हुए भारत का नाम वैश्विक स्तर पर ऊंचा करें।

अपने संबोधन के अंत में डॉ. जयशंकर ने सफलता का मंत्र देते हुए कहा कि आज हर क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है, इसलिए निरंतर मेहनत, नेतृत्व क्षमता और मजबूत नेटवर्किंग बेहद जरूरी है। उन्होंने छात्रों को आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने और देश के विकास में योगदान देने का आह्वान किया।


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