21 फरवरी की सुबह छत्तीसगढ़ के बीजापुर के घने जंगलों में असामान्य खामोशी छाई हुई थी। हवा पेड़ों की पत्तियों से गुजर रही थी, लेकिन सीआरपीएफ की 214वीं वाहिनी के जवान हर कदम सावधानी से रख रहे थे।

कांडलापरती-2 कैंप से निकले जवान नीलमड़गु गांव की ओर सर्च और एरिया डामिनेशन अभियान पर थे। जंगल की पगडंडी पर आगे बढ़ते हुए, जवान मिट्टी के नीचे छिपे बारूद पर नजर रखे हुए थे। डिमाइनिंग टीम ने मेटल डिटेक्टर से संकेत पाया।

मिट्टी हटाने पर 16 बीयर बाटल आइईडी और एक पांच किलो का प्रेशर कुकर आइईडी मिली। बम निरोधक दस्ते ने इन्हें तुरंत निष्कि्रय कर दिया। यदि ये विस्फोटक समय पर नहीं मिलते, तो यह रास्ता किसी भीषण घटना का गवाह बन सकता था।

बस्तर के जंगलों में सुरक्षाबलों के लिए यह कोई नई बात नहीं है। पिछले 25 वर्षों में बम निरोधक दस्ते ने 4,602 आइईडी बरामद किए हैं। 1,268 आइईडी विस्फोटों में 345 सुरक्षाकर्मी बलिदान हुए और 917 घायल हुए।

आम नागरिक भी इस खतरे से अछूते नहीं रहे, अलग- अलग विस्फोटों मे राज्य के 138 लोगों की मौत हुई और 728 घायल हुए। अप्रैल 2023 में जवान शंकर पारेट एक प्रेशर आइईडी विस्फोट में गंभीर रूप से घायल हुए। जुलाई 2024 में जवान किशन हपका ने भी एक पैर गंवाया, लेकिन हौसले के साथ वे ड्यूटी पर लौट आए और अब बीजापुर कोतवाली में पदस्थ हैं।

बस्तर रेंज के आईजीपी सुंदरराज पी. के अनुसार, सुरक्षाबलों ने पिछले अनुभवों से सबक लिया है। अब चार पहिया वाहनों की बजाय बाइक पेट्रोलिंग और पैदल गश्त को प्राथमिकता दी जा रही है। आधुनिक तकनीक जैसे आइईडी डिटेक्टर और ड्रोन निगरानी भी अभियानों का हिस्सा बन चुकी है।

बम निरोधक दस्ते की आधुनिक तकनीक-

  • मेटल डिटेक्टर:जमीन के नीचे छिपे धातु आधारित विस्फोटकों का पता लगाने के लिए।
  • ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (जीपीआर): मिट्टी के भीतर छिपी वस्तुओं की पहचान करने वाली उन्नत तकनीक।
  • बम डिस्पोजल सूट: विस्फोट से सुरक्षा देने वाला विशेष सुरक्षा सूट।
  • स्निफर डाग स्क्वाड: प्रशिक्षित कुत्ते जो विस्फोटक की गंध पहचान लेते हैं।
  • ड्रोन निगरानी: जंगल और सड़कों की हवाई निगरानी से संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाना।

बस्तर के 10 बड़े आइईडी हमले

  1. 3 सितंबर 2005- बीजापुर, पोंजेर नाला: 24 सुरक्षाकर्मी बलिदान।
  2. 17 मई 2010- चिंगावरम (सुकमा): 16 सुरक्षाकर्मी बलिदान, 15 नागरिक मारे गए।
  3. 25 मई 2013-झीरम घाटी: 10 जवान बलिदान, 17 नेता व नागरिक मारे गए।
  4. 11 मार्च 2014- टाहकवाड़ा (सुकमा): 15 सुरक्षाकर्मी बलिदान।
  5. 11 मार्च 2017- बुरकापाल (सुकमा): 12 सीआरपीएफ जवान बलिदान।
  6. 30 अप्रैल 2017- चिंतागुफा: 25 जवान बलिदान।
  7. 9 अप्रैल 2019- दंतेवाड़ा: विधायक भीमा मंडावी सहित पांच लोगों की मौत।
  8. 23 मार्च 2021- नारायणपुर: पांच जवान बलिदान, 25 घायल।
  9. 26 अप्रैल 2023- अरनपुर (दंतेवाड़ा): 11 डीआरजी जवान बलिदान।
  10. 6 जनवरी 2025- बीजापुर: आठ जवान बलिदान, एक नागरिक की मौत।