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Thursday, April 16, 2026

9 बजे तक केवल 13% मतदाता ही मतदान कर पाए।

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CG City News

बिहार विधानसभा चुनाव 2025: पहले चरण में 121 सीटों पर मतदान, नीतीश बनाम तेजस्वी की प्रतिष्ठा दांव पर

पटना:
बिहार की सत्ता के लिए हाई-प्रोफाइल जंग की शुरुआत हो चुकी है। राज्य की 243 विधानसभा सीटों में से आधी यानी 121 सीटों पर पहले चरण का मतदान आज हो रहा है। सुबह 9 बजे तक 13.13% मतदान दर्ज किया गया था। इस चरण में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव, पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और एलजेपी नेता चिराग पासवान जैसे दिग्गज नेताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मतदान के बाद सोशल मीडिया पर अपील की, “लोकतंत्र के इस पर्व में सभी लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और दूसरों को भी मतदान के लिए प्रेरित करें।” वहीं लालू प्रसाद यादव ने अपने परिवार की स्याही लगी उंगलियों की तस्वीर साझा करते हुए कहा — “तवा पर रोटी को पलटते रहना चाहिए, वरना जल जाएगी। बीते 20 साल बहुत हुए, अब युवाओं की सरकार और नए बिहार के लिए तेजस्वी की सरकार जरूरी है।”

एनडीए की ओर से उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दावा किया कि एनडीए भारी बहुमत से सत्ता में लौटेगा, जबकि सहयोगी चिराग पासवान ने लोगों से रिकॉर्ड मतदान की अपील की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मतदाताओं को लोकतंत्र के इस उत्सव में पूरे जोश से भाग लेने को कहा और भरोसा जताया कि एनडीए को इस बार भी जनता का अभूतपूर्व समर्थन मिलेगा।

दूसरी ओर, महागठबंधन ने नीतीश सरकार के खिलाफ जनता के असंतोष और तेजस्वी यादव के रोजगार वादों को चुनावी आधार बनाया है। तेजस्वी यादव ने “हर घर नौकरी” का वादा कर युवाओं को आकर्षित किया है। 2020 के विधानसभा चुनाव में आरजेडी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, जबकि सत्ता एनडीए के हाथ में गई थी। इस बार तेजस्वी यादव पूरी रणनीति के साथ युवाओं और बेरोजगार वर्ग को लुभाने में जुटे हैं।

भाजपा ने इस बार भी अपने पारंपरिक “हाई-ऑक्टेन” प्रचार अभियान पर भरोसा जताया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कई रैलियों को संबोधित किया, जबकि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और गृहमंत्री अमित शाह ने साफ कर दिया कि नीतीश कुमार ही एनडीए के मुख्यमंत्री चेहरा रहेंगे। पहले चर्चाएं थीं कि नीतीश को किनारे कर भाजपा नया चेहरा ला सकती है, लेकिन अंततः पार्टी ने गठबंधन की एकता बनाए रखने के लिए नीतीश पर ही भरोसा जताया।

कांग्रेस इस बार महागठबंधन में कमजोर कड़ी मानी जा रही है। पिछली बार भी कांग्रेस का प्रदर्शन निराशाजनक रहा था और वह आरजेडी से काफी पीछे रह गई थी। हालांकि राहुल गांधी और तेजस्वी यादव ने शुरुआती दौर में संयुक्त रैलियाँ कीं, लेकिन राहुल गांधी के लंबे समय तक प्रचार से दूर रहने के कारण गठबंधन की रफ्तार धीमी पड़ गई।

इसी बीच, चुनाव में एक नया और दिलचस्प चेहरा प्रशांत किशोर (PK) हैं। कभी भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए चुनावी रणनीति बना चुके प्रशांत किशोर ने अपनी नई पार्टी जन सुराज के साथ इस बार मैदान में उतरकर तीसरा विकल्प देने की कोशिश की है। उन्होंने कहा है कि उनकी पार्टी या तो “10 से कम या 150 से ज्यादा सीटें” जीतेगी। उन्होंने किसी भी दल से गठबंधन से इनकार किया है और सभी 243 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। जन सुराज का मुख्य फोकस भ्रष्टाचार, शिक्षा और सरकारी सेवाओं की गिरती गुणवत्ता पर है।

मुख्य मुद्दे:
चुनाव में इस बार भी “रोटी, रोजगार और भ्रष्टाचार” जैसे पारंपरिक मुद्दे हावी हैं। तेजस्वी यादव का “हर घर सरकारी नौकरी” देने का वादा चर्चा में है, जो लगभग 1.3 करोड़ नौकरियों का दावा करता है। वहीं एनडीए इस वादे को “अवास्तविक” बता रहा है। एनडीए ने अपने घोषणापत्र में 1 करोड़ रोजगार और महिलाओं को “लखपति योजना” के तहत आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का वादा किया है। भाजपा-जदयू गठबंधन का दावा है कि उनके शासन में बिहार की आर्थिक वृद्धि दर में सुधार हुआ है और इंफ्रास्ट्रक्चर, सड़क व बिजली के क्षेत्र में राज्य ने प्रगति की है।

क्षेत्रीय समीकरण और पिछला प्रदर्शन:
पहले चरण के तहत जिन इलाकों में मतदान हो रहा है, वे मुख्य रूप से मध्य बिहार के जिले हैं — पटना, नालंदा, गया, नवादा, और औरंगाबाद जैसे क्षेत्र। 2020 के चुनाव में महागठबंधन ने इन इलाकों में शानदार प्रदर्शन करते हुए 63 सीटें जीती थीं, जबकि भाजपा और जदयू की झोली में 55 सीटें गई थीं। यही कारण है कि इस बार दोनों गठबंधन यहां पूरा जोर लगा रहे हैं।

राजनीतिक समीकरण:
बिहार की राजनीति एक बार फिर दो ध्रुवों पर सिमटती दिख रही है — एक ओर एनडीए का अनुभव और विकास का दावा, तो दूसरी ओर महागठबंधन की युवा ऊर्जा और बदलाव का वादा। नीतीश कुमार के सामने जहां सत्ता विरोधी लहर और थकान की चुनौती है, वहीं तेजस्वी यादव के सामने अनुभवहीनता और व्यवहारिक सीमाओं का सवाल खड़ा है।

वोटरों के बीच इस बार खासतौर पर युवाओं की भूमिका निर्णायक मानी जा रही है। राज्य में 18 से 35 वर्ष के मतदाताओं की संख्या लगभग 40% है। बेरोजगारी, पलायन और शिक्षा की गिरती गुणवत्ता जैसे मुद्दे इन मतदाताओं को सबसे ज्यादा प्रभावित करते हैं।

निष्कर्ष:
पहले चरण के मतदान के साथ बिहार में सियासी जंग की शुरुआत हो चुकी है। नीतीश कुमार की साख, तेजस्वी यादव की महत्वाकांक्षा और प्रशांत किशोर की नई चुनौती — इन तीनों के बीच यह मुकाबला दिलचस्प मोड़ लेने जा रहा है। आने वाले चरणों में यह तय होगा कि क्या नीतीश एक बार फिर सत्ता में वापसी कर पाते हैं या बिहार की जनता इस बार “परिवर्तन” के नारे पर भरोसा जताती है।


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